वनांचल क्षेत्र कोदवागोड़ान में पुलिस चौकी की माँग
कब पूरा होगा क्षेत्रवासियों का वर्षों पुराना सपना
पंडरिया विधानसभा का वनांचल क्षेत्र मुख्यतः दो भागों में विभाजित है। एक कुकदुर क्षेत्र, जो अब तहसील बन चुका है. और दूसरा कोदवागोड़ान क्षेत्र, जो आज चुका है। भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। इन दोनों क्षेत्रों की विकास यात्रा में स्पष्ट असंतुलन देखा जा सकता है। कुकदुर जहां हाईवे से जुड़ा हुआ और राजनीतिक दृष्टि से प्रभावशाली है, वहीं कोदवागोड़ान पिछड़ेपन और प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है। इसी बड़े असंतुलन का एक प्रमुख एवं जीवंत उदाहरण है, कोदवागोड़ान में अब तक पुलिस चौकी की अनुपस्थिति।
कुकदुरः विकास की दौड़ में अग्रणी
कुकदुर क्षेत्र भौगोलिक रूप से मुख्य राष्ट्रीय राजमार्ग पर बसा हुआ है। यह कवर्धा पंडरिया से बजाग होते हुए मध्यप्रदेश के बड़े शहरों को जोड़ता है। बेहतर सड़कें, आवागमन की सुविधा और राजनीतिक गतिविधियों की अधिकता ने कुकदुर को विकास की मुख्यधारा में रखा है। यहाँ कांग्रेस और भाजपा, दोनों ही दलों के कार्यकर्ता सक्रिय भूमिका निभाते हैं वहीं शासन-प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का भी यहाँ नियमित आना-जाना रहता है। यही कारण है कि कुकदुर में वर्षों पहले थाना बन गया और आज यह एक तहसील के रूप में भी विकसित हो
ग्राम कोदवागोड़ान ज.स. 1825
कोदवागोड़ानः पिछड़ेपन की कहानी
दूसरी ओर, कौदवागोड़ान क्षेत्र एक विस्तृत लेकिन उपेक्षित अंचल है, जहाँ अधिकांश आबादी बैगा आदिवासी एवं ओबीसी समुदाय की है। इस क्षेत्र से कोई भी राष्ट्रीय वा राज्य मार्ग नहीं जुड़ता, जिससे आवागमन बेहद कठिन है। यहाँ के ग्रामीणों का प्रशासन और नेताओं से संपर्क सीमित है, और यही वजह है कि यह क्षेत्र अभी तक एक साधारण पुलिस चौकी से भी वंचित है। आज भी अगर कोई आपराधिक घटना घटती है, तो लोगों को 20/25 किलोमीटर दूर कुकदुर थाना जाना पड़ता है। अंतिम छोर पर बसे गाँव जैसे अमरपुर, सरईसेत, मदनपुर जैसे स्थानों से धाने की दूरी और भी भी अधिक लगभग 35 किलोमीटर हो जाती है।
पिछली सरकारों में हुई पहल, पर अधूरी रह गई उम्मीदें
स्थापना कर शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में बैगा आदिवासियों के लिए प्रशंसनीय कार्य किए। इसके बाद जब अभिषेक सिंह राजनांदगांव से सांसद थे. तो उनके कार्यकाल के अंतिम वर्षों में कोदवागोड़ान में पुलिस चौकी खोलने की मांग जोर पकड़ने लगी थी। उस समय क्षेत्रवासियों को उम्मीद थी कि चौकी जल्द स्वीकृत हो जाएगी, लेकिन सांसद अभिषेक सिंह का कायर्काल समाप्त होते ही यह प्रयास अधूरा रह गया।
नई विधायक से आशाएं
डेढ़ साल पूर्व इस क्षेत्र की भावना बोहरा जैसी सक्रिय ऊर्जावान और संवेदनशील विधायक मिली हैं, जिन्हें विधानसभा चुनाव में प्रामीणों का अपार समर्थन प्राप्त किया। और उन्हें क्षेत्र के लोगों ने भर भर कर वोट दिया है। इस क्षेत्र की आम जनता की तकलीफ को दूर करने एवं क्षेत्र के विकास के लिए वे दिन रात मेहनत भी कर रही है। ग्रामीणों को विश्वास है कि विधायक भावना बोहरा इस क्षेत्र की वर्षों पुरानी इस मूलभूत माँग को प्राथमिकता में लेकर सरकार के समक्ष प्रभावी रूप से रखेंगी। और जनता की वर्षों पुरानी मांग को पूरा कराने में अपना योगदान देंगी।
आपराधिक घटनाओं में वृद्धि, पुलिस चौकी अनिवार्य
कोदवागोड़ान और इसके आसपास का क्षेत्र लगभग 25 से 30 किलोमीटर तक फैला हुआ है। इसके अंतर्गत चतरी, मंगली, भर्रा, मदनपुर, अमरपुर, सरईसेत, निहालपुर, बिरइनबाह, जामुनपानी, बदौरा, खौरडोगरी, गौरकाषा, दुल्लापुर, लालपुर जैसे कई महत्वपूर्ण और बड़ी ग्राम पंचायतें और उनके आश्रित गाँव आते हैं। इन क्षेत्रों में अपराध की घटनाएँ जैसे चोरी, घरेलू हिंसा, भूमि विवाद, अवैध शराब तस्करी जुआ सट्टा एवं शराबखोरी इत्यादि घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही हैं। पुलिस बल की अनुपलब्धता के कारण अधिकांश अपराधों की रिपोर्ट तक दर्ज नहीं हो पाती, जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं।
तुलनात्मक दृष्टिकोणः कबीरधाम बनाम मुंगेली जिला
यह विडंबना ही है कि कबीरधाम जैसे पुराने जिले के सबसे बड़ी तहसील पंडरिया के कोदवागोड़ान जैसे क्षेत्र में आज तक पुलिस चौकी नहीं खुली, जबकि बगल के के नए जिले मुंगेली के लोरमी तहसील में डॉडौरी, अखरार, चिल्फी जैसे छोटे कस्बा नुमा स्थानों में भी पुलिस चौकियाँ स्थापित की जा चुकी हैं। क्या कचीरधाम प्रशासन इस मामले में मुंगेली प्रशासन से पीछे है? क्या यहां के प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी इस मामले को लेकर असंवेदन शील हैं। यह सवाल आज हर क्षेत्रवासियों के मन में है।
इस क्षेत्र में पूर्व विधायक फूलचंद जैन के कार्यकाल में कुछ विकास कार्य अवश्य हुए थे। उन्होंने वहां वनवासी आश्रम की



