छत्तीसगढ़ में नगरीय निकाय और त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव होने हैं. राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव का ऐलान कभी भी कर सकता है, लेकिन उससे पहले एक नया ही विवाद शुरू हो गया है. चुनाव से पहले पंचायत में सरपंच के पद आरक्षण को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत नेऊर में सरपंच पद अनुसुचित जाति के लिए आरक्षित हुआ है विडंबना यह है कि इस पंचायत में एक भी अनुसूचित जाति परिवार से नहीं है यहां अनुसूचित जनजाति और पिछड़ा वर्ग के लोग निवासरत हैं परंतु किस आधार पर यहां अजा आरक्षण हुआ है
यह गांव इसलिए चर्चा में है क्योंकि ग्राम पंचायत नेऊर को अनुसूचित जाति महिला सीट का दर्जा प्राप्त हुआ है जबकि इस गांव में SC वर्ग का कोई मतदाता नहीं है. नेऊरर के ग्रामीणों का दावा है कि करीब 1192 मतदाताओं वाले उनके गांव में अनुसूचित जाति वर्ग का कोई भी मतदाता नहीं है. गांव की जनसंख्या करीब 2800 है, जिसमें 80 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोग हैं. बावजूद इसके सरपंच पद अनुसूचित जाति महिला के लिए आरक्षित कर दिया गया है. चुनाव से पहले अब आरक्षण को लेकर फिर से विचार करने की मांग की जा रही है।



