जनहित या जेब भरने का खेल , बरसाती नाले पर दो पुलिया, पाइप पुलिया काफी थी फिर भी 40 लाख फूंके की स्वीकृति 

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जनहित या जेब भरने का खेल , बरसाती नाले पर दो पुलिया, पाइप पुलिया काफी थी फिर भी 40 लाख फूंके की स्वीकृति
कवर्धा , जिले के जनपद पंचायत बोड़ला अंतर्गत ग्राम पंचायत बाघुटोला के ग्राम खीरसाली में खनिज न्यास (DMF) मद से स्वीकृत दो पुलिया निर्माण कार्य अब जनहित से अधिक जेब भरने के खेल के रूप में देखे जा रहे हैं। महज 20 मीटर की दूरी पर एक ही बरसाती नाले पर दो अलग–अलग पुलिया निर्माण की स्वीकृति ने प्रशासनिक निर्णय, तकनीकी औचित्य और सार्वजनिक धन के उपयोग पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त दस्तावेजों के अनुसार,
झाँगन तालाब के पास पुलिया निर्माण हेतु तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 517, दिनांक 11 जुलाई 2025 को 19.90 लाख रुपए की प्रशासकीय स्वीकृति दी गई। वहीं, उसी ग्राम में गेंदू तालाब के पास पुलिया निर्माण के लिए तकनीकी स्वीकृति क्रमांक 579, दिनांक 25 जुलाई 2025 को 19.50 लाख रुपए स्वीकृत किए गए। कुल मिलाकर लगभग 40 लाख रुपए की राशि दो पुलियों पर खर्च की जा रही है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि दोनों पुलिया निर्माण स्थल एक ही बरसाती नाले पर स्थित हैं, जिसमें साल के अधिकांश समय पानी नहीं रहता। स्थानीय ग्रामीणों और जानकारों का कहना है कि यहां कम लागत वाली पाइप पुलिया बनाकर भी आवागमन की आवश्यकता पूरी की जा सकती थी, लेकिन इसके बावजूद महंगे निर्माण कार्यों को मंजूरी दे दी गई।
ग्रामीणों के अनुसार, पुलिया के आगे का क्षेत्र पहाड़ी और जंगल है, जहां न तो आबादी है और न ही नियमित यातायात। ऐसे में करोड़ों की योजनाओं की बजाय सीमित उपयोग वाले स्थान पर लाखों रुपए खर्च किया जाना अनुचित स्थल चयन की ओर इशारा करता है। आरोप यह भी हैं कि इन निर्माण कार्यों से चुनिंदा लोगों को ही लाभ मिलेगा, जबकि आम जनता को कोई प्रत्यक्ष फायदा नहीं है।
यह मामला केवल दो पुलियों तक सीमित नहीं है। चर्चा है कि इसी विकासखंड में जुलाई–अगस्त जैसे भारी वर्षा वाले महीनों में पुलिया, चेक डैम और सीसी रोड जैसे कार्यों के लिए 13 करोड़ रुपए से अधिक की स्वीकृतियां दी गई हैं। जानकार इसे खनिज न्यास मद की खुली बंदरबांट बता रहे हैं।
नियमों के अनुसार, जिला खनिज न्यास (DMF) और प्रधानमंत्री खनिज क्षेत्र कल्याण योजना की राशि का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में आवश्यक, जनोपयोगी और प्राथमिकता वाले कार्यों पर किया जाना चाहिए। तकनीकी स्वीकृति देते समय स्थल की उपयोगिता, लागत–लाभ विश्लेषण और वैकल्पिक समाधान का मूल्यांकन अनिवार्य है। इसके बावजूद इतने कम अंतराल पर दो पुलिया स्वीकृत होना वित्तीय अनुशासन पर सवाल खड़े करता है।
मामले को लेकर अब स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय जांच की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते जांच नहीं हुई, तो जिला खनिज न्यास जैसी जनकल्याणकारी योजना भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी का माध्यम बनकर रह जाएगी।

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