खेती के लिए भेड़ागढ़ में बिना अनुमति के ही रातों-रात काट डाले एक हजार से ज्यादा पेड़

lok sev
IMG-20260114-WA0060
previous arrow
next arrow

 हरियाली के दुश्मन जंगल में नीलगिरी और अन्य प्रजाति के पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाकर मैदान में तब्दील कर दिया

खेती के लिए भेड़ागढ़ में बिना अनुमति के ही रातों-रात काट डाले एक हजार से ज्यादा पेड़

वन विकास निगम क्षेत्र में खेती के लिए रातों-रात कुल्हाड़ी से 1 हजार से ज्यादा पेड़ों को काट दिए गए। इनमें नीलगिरी और अन्य प्रजाति के पेड़ों की कटाई कर दी गई है। भेड़ागढ़-बैगापारा के कक्ष क्रमांक- 1467 और 1468 में अज्ञात लोगों ने मंगलवार-बुधवार दरमियानी रात यह बड़ी वारदात की।

भूजल स्तर में गिरावट के मामले में पंडरिया ब्लॉक अब रेड जोन में शामिल हो चुका है। इसके बावजूद जंगल की कटाई थम नहीं रही है। लोग खेती के लिए पेड़ काट रहे हैं। लगातार कटाई हो रही है। लकड़ी काटने वालों का हौसला बढ़ता जा रहा है। पेड़ों की अवैध कटाई की सूचना मिलने पर वन निगम में हड़कंप मच गया है। बुधवार दोपहर मौके लिए टीम रवाना की गई है। अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों की गिनती की जा रही है। परियोजना रेंजर दीपिका सोनवानी का कहना है कि पेड़ों की कटाई की सूचना मिली है। मौके पर टीम भेजी गई है। पीआर करके वन अपराध दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है।

खेत बनाने के लिए पेड़ काट रहेः जंगल की कटाई खेत बनाने के लिए की जा रही है। एक तरफ बड़े पैमाने पर एक साथ पेड़ काटकर खेत बनाए जा रहे हैं। दूसरी ओर घने जंगल को जलाऊ लकड़ी के लिए धीरे-धीरे काटा जा रहा है। फिर मैदान में तब्दील कर खेती के लिए कब्जा किया जाता है।

सूचना के बाद मौके पर पहुंची वन विभाग की टीम, काटे गए पेड़ों की गिनती की जा रही

 नीलगिरी और अन्य प्रजाति के पेड़ काटे गए।

सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा विभाग इसलिए तस्कर बेखौफ

पखवाड़े भर पहले इसी क्षेत्र में आरी मशीन से पेड़ काटने की तस्वीर सामने आई थी। विभाग ने सख्त कदम नहीं उठाया। हजारों पेड़ों की कटाई बड़ा अपराध है। जंगल को पूरी तरह खत्म करने की

दिशा में लोग सक्रिय हैं। वन विकास निगम कटाई रोकने में नाकाम साबित हो रहा है। वन कर्मचारी भी वन क्षेत्र में निवास नहीं करते। बड़े पैमाने पर कटाई मिलीभगत के बिना संभव नहीं है।

क्षेत्र में लकड़ी तस्करों को कार्रवाई का कोई डर नहीं

जंगल की कटाई नहीं थमने का बड़ा कारण सख्त कार्रवाई का न होना है। क्षेत्र में लकड़ी तस्कर सक्रिय हैं। वन विभाग और निगम द्वारा कटाई और अतिक्रमण पर कड़ी कार्रवाई नहीं की जाती। लकड़ी तस्करों को डर नहीं है। बताया जाता है कि इन्हें राजनीतिक संरक्षण प्राप्त है। कुछ लोग पेड़ कटवा कर खुद के लिए खेती करवाते हैं। कुछ कर्मचारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब वे लकड़ी चोरों, अतिक्रमणकारियों और अवैध लकड़ी परिवहन करने वालों पर कार्रवाई करते हैं, तो नेताओं के फोन आने लगते हैं।

एक्सपर्ट व्यू: 1 मिनट में साढ़े 7 लीटर ऑक्सीजन लेते हैं

बोड़ला बीएमओ डॉ. पुरुषोत्तम राजपूत बताते हैं कि एक व्यक्ति एक सांस में 500 एमएल ऑक्सीजन लेता है। 1 मिनट में 15 बार सांस लेते हैं। इस हिसाब से एक मिनट में साढ़े 7 लीटर व एक दिन में 10800 लीटर ऑक्सीजन सांस के रूप में लेते हैं। पेड़ों की अंधाधुंध कटाई जलवायु परिवर्तन के लिए जिम्मेदार है। तापमान बढ़ता है।

रोजाना एक पेड़ 250 लीटर तक ऑक्सीजन हमें देता है

एक पेड़ की कीमत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि एक व्यक्ति को 1 दिन में 10 हजार लीटर ऑक्सीजन की जरूरत होती है, जिसमें 250 लीटर एक पेड़ हमें मुफ्त में देता है। भेड़ागढ़-बैगापारा में काटे गए 1,000 पेड़ों से हर दिन 2.50 लाख लीटर ऑक्सीजन मिल पाती, जिससे कई लोगों को जीने के लिए मुफ्त में ऑक्सीजन की जरूरतें पूरी होती, लेकिन इसे काटकर वास्तव में लोगों की सांसें काट दी गई। हरे-भरे पेड़ों को काटकर पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचाया जा रहा है। एक पेड़ को तैयार करने में कई साल लग जाते हैं।

Related posts