किसी भी बच्चे को स्कूल से निष्कासित नहीं किया जाएगा
केंद्र सरकार ने वर्ष के अंत में परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रहने वाले कक्षा पांच और आठ के विद्यार्थियों के लिए ‘अनुत्तीर्ण न करने की नीति’ को खत्म कर दिया है। वर्ष 2019 में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) में संशोधन के बाद, कम से कम 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने पहले ही इन दो कक्षाओं के लिए ‘अनुत्तीर्ण न करने की नीति’ को खत्म कर दिया है। शिक्षा मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘चूंकि स्कूली शिक्षा राज्य का विषय है, इसलिए राज्य इस संबंध में अपना निर्णय ले सकते हैं।
राजपत्र अधिसूचना के अनुसार, नियमित परीक्षा के आयोजन के बाद यदि कोई बच्चा समय-समय पर अधिसूचित प्रोन्नति मानदंडों को पूरा करने में विफल रहता है, तो उसे परिणाम की घोषणा की तारीख से दो महीने की अवधि के भीतर अतिरिक्त निर्देश और पुनः परीक्षा का अवसर दिया जाएगा। अधिसूचना में कहा गया, ‘यदि पुनः परीक्षा में बैठने वाला छात्र प्रोन्नति (अगली कक्षा में जाने की अर्हता) के मानदंडों को पूरा करने में असफल रहता है, तो उसे पांचवीं या आठवीं कक्षा में ही रोक दिया जाएगा।’ हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि किसी भी बच्चे को प्रारंभिक शिक्षा पूरी होने तक स्कूल से निष्कासित नहीं किया जाएगा।>
फेल होने पर दो महीने के अंदर दोबारा परीक्षा
छत्तीसगढ़ में भी परीक्षा नीति बदलने पर विचार
छत्तीसगढ़ में 5वीं एवं 8वीं केन्द्रीकृत परीक्षा इसी शिक्षा सत्र से प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया है। इसके लिए दिशा- निर्देश जारी भी किए जा चुके हैं। इसमें 5वीं-8वीं की केन्द्रीकृत परीक्षा तथा किसी विषय में फेल होने पर पूरक परीक्षा भी आयोजित की जाएगी परंतु विद्यार्थी को उस कक्षा में नहीं रोका जाएगा। अब केन्द्र शासन द्वारा आरटीई अधिनियम में किए गए संशोधन कि ‘अनुत्तीर्ण न करने की नीति को खत्म किया जाता है’ के बाद छत्तीसगढ़ में भी इस नीति को लागू करने पर विचार किया जाएगा। फेल-पास सिस्टम छत्तीसगढ़ इसी सत्र से लागू होगा अथवा अगले सत्र से इस पर अंतिम निर्णय लिया जाना है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) लागू होने के बाद से पहली से 8वीं तक फेल-पास सिस्टम बंद कर दिया गया है। इसके चलते शिक्षा के स्तर में काफी गिरावट आई है। इसे देखते हुए ही राज्य शासन ने 5वीं-8वीं केन्द्रीकृत परीक्षा लेने का निर्णय लिया है।



