सुदूर वनांचल में पिकअप से सवारी डोने का फिर दोहराई जा सकती है बाहपानी जैसी अंजाम को

lok sev
IMG-20260114-WA0060
previous arrow
next arrow

 

सुदूर वनांचल में पिकअप से सवारी डोने का सबक नहींः फिर दोहराई जा सकती है बाहपानी जैसी त्रासदी लगातार जारी

 आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिकअप चालक खुलेआम नियमों की बज्जियां उड़ाते हुए नजर आ रहे हैं। नगर के आसपास एवं कुकदुर क्षेत्र में साप्ताहिक बाजारों के दौरान पिकअप और टैक्टर जैसे मालवाहक वाहनों से सवारी ढोने का सिलसिला धड़ल्ले से जारी है। विगत वर्ष पुलिस अधीक्षक द्वारा ग्रामीण दक्षेत्रों में इस पर रोक लगाने के लिए अभियान चलाया गया था. लेकिन अब स्थिति जस की तस बनी हुई है। कुकदुर, कुई, पोलमी, नेडर जैसे बाजारों में कानून व्यवस्था मजाक बनकर रह गई है। ओवरलोड पिकअप में जान हथेली पर रखकर बाजार जाते व्यापारी, बड़ी दुर्घटना को आमंत्रण दे रहे हैं।

ओवरलोड सवारी एवं सामान भरकर जाते हैं

वाहन चालक

पंडरिया क्षेत्र के ग्रामीण अंचलों में हर दिन लगने वाले साप्ताहिक बाजारों में पिकअप और ट्रैक्टर जैसे मालवाहक वाहनों से सवारी होने का खतरनाक बलन फिर से तेजी से बढ़ गया है। मंगलवार से रविवार तक कामठी, कुकदुर, कोदवा, तरेगांव, कांदावानी, नेउर आदि बाजारों में बड़ी संख्या में व्यापारी और ग्रामीण ओवरलोड होकर बिना किसी सुरक्षा के बाजार पहुंचते हैं। इन वाहनों में सामान और सवारी दोनों को भर दिया जाता है, जिससे संतुलन बिगड़ने का बड़ा खतरा बना रहता है।

विगत वर्षों में हुई दुर्घटनाओं के बावजूद प्रशासन का इस ओर ध्यान न देना गंभीर लापरवाही है। यदि समय रहते सख्त कारवाई नहीं की गई तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होना तय है। प्रशासन को चाहिए कि इन बाजारों में निगरानी बढ़ाकर नियमों का पालन सुनिश्चित करें और मासूम लोगों की जान की सुरक्षा करे।

प्रशासन की लापरवाही से ग्रामीणों की जान जोखिम में

पिछले वर्ष मई में ही व्यहपानी के पास एक पिकअप वाहन के गहरी खाई में गिरने से 19 लोगों की ददर्नाक मौत हुई थी। वह हादसा तेंदुपत्ता तोड़ने जा रहे लोगों को लेकर हुआ था। अब फिर वही सीजन लौट आया है, लेकिन प्रशासन ने उस घटना से कोई सबक नहीं लिया है। पिकअप और

ट्रैक्टरों में ठूंस-हंसकर सवारियां भरकर लाना ले जाना सामान्य बात बन चुकी है।

बिना परमिट और बिना लाइसेंस दौड़ रहीं पिकअप स्कॉर्पियो-बोलेरो

कुकदुर, दमगढ़, लोखन, देवसरा, माहीडब्बरा जैसे गोत्रों में निजी वाहनों का उपयोग टैक्सी के रूप में किया जा रहा है। इनमें से कई गाड़ियों के पास न परमिट है और न ही ड्राइवरों के पास वैध लाइसेंस। इनमें कुछ ड्राइवर तो नाबालिग और अनुभवहीन हैं, जिनकी लापरवाही से कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है। लेकिन अभी तक किसी स्तर पर कोई ठोस

जांच या कारवाई नहीं हुई है। प्रशासन की चुप्पी से बढ़

रहा लोगों का आक्रोश

स्थानीय लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या कुकदुर पुलिस प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है? क्या पंडरिया में बैठे एसडीएम जैसे अधिकारी और फुकदुर में बैठे नायब तहसीलदार की कोई जिम्मेदारी नहीं है? ग्रामीणों का आरोप है कि पुलिस की प्राथमिकता अवैध शराब, जुआ-सट्टा से कमाई करना है, न कि जनता की सुरक्षा।

बैगा आदिवासी अंचल में हो रही गंभीर लापरवाही

कुकदुर का पूरा क्षेत्र बैगा आदिवासी बाहुल्य है. जो कि पिछड़े समुदाम में आते हैं और भोले भाले होते हैं। उनकी सुरक्षा और जीवन की जिम्मेदारी क्या शासन-प्रशासन की नहीं है? जब तक कोई बड़ा हादसा नहीं होता, तब तक प्रशासन अआँखें मूंदे बैठा रहता है। यही कारण है कि क्षेत्र में डर और असंतोष का माहौल पनप रहा है।

स्थानीयों की मांगः सख्त कार्रवाई और निगरानी जरूरी

क्षेत्रवासियों ने मांग की है कि पिकअप और ट्रैक्टर में सवारी ढोने पर तत्काल रोक लगाई जाए। बिना परमिट और बिना लक्ष्सेस के वाहन चलाने वालों पर सख्त कारवाई हो। साथ ही साप्ताहिक बाजारों के दौरान निगरानी के लिए विशेष टीम तैनात की जाए, ताकि बाहपानी जैसी घटना की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। क्या प्रशासन अब भी सोता रहेगा या समय रहते चेतकर जिम्मेदारी निभाएगा?

Related posts