वनांचल ग्राम कुल्हीडोंगरी में 165 आदिवासी सदस्यों की घर वापसी, संस्कृति गौरव सम्मेलन में हुआ अभिनंदन

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वनांचल ग्राम कुल्हीडोंगरी में 165 आदिवासी सदस्यों की घर वापसी, संस्कृति गौरव सम्मेलन में हुआ अभिनंदन
कुल्हीडोंगरी (वनांचल क्षेत्र)। वनांचल ग्राम कुल्हीडोंगरी में आयोजित संस्कृति गौरव सम्मेलन एवं अभिनंदन समारोह के दौरान आदिवासी परिवार के 165 सदस्यों ने अपने मूल धर्म में वापसी करते हुए सांस्कृतिक अस्मिता और आत्मगौरव का संदेश दिया। इस अवसर पर सभी परिवारों का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पैर पखारकर अभिनंदन किया गया और सम्मानपूर्वक समाज की मुख्यधारा में पुनः स्वागत किया गया।
कार्यक्रम में उपस्थित जनप्रतिनिधियों और समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि यह केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि अपनी जड़ों, परंपराओं और सांस्कृतिक पहचान से पुनः जुड़ने का भावनात्मक और सामाजिक अभियान है। घर वापसी करने वाले परिवारों ने अपने मूल धर्म और परंपराओं में आस्था व्यक्त करते हुए समाज के साथ मिलकर आगे बढ़ने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि वे अपनी संस्कृति, रीति-रिवाजों और पारंपरिक मूल्यों को सहेजते हुए नई पीढ़ी को भी उनसे परिचित कराएंगे।

सम्मेलन के दौरान वक्ताओं ने कहा कि वनांचल क्षेत्रों में बीते वर्षों में विकास कार्यों की रफ्तार तेज हुई है। डबल इंजन भाजपा सरकार की योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार आया है। शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ सीधे जरूरतमंदों तक पहुंचने से क्षेत्र में विश्वास और सकारात्मक वातावरण का निर्माण हुआ है।
जनप्रतिनिधियों ने बताया कि निरंतर संवाद, जनसंपर्क और पारदर्शी कार्यशैली के कारण वनांचल के जनजातीय परिवारों में विश्वास मजबूत हुआ है। यही कारण है कि वे अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौटते हुए विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का निर्णय ले रहे हैं। कुल्हीडोंगरी का यह आयोजन सांस्कृतिक आत्मविश्वास और विकास के समन्वय का प्रतीक बनकर उभरा है।

कार्यक्रम में यह भी स्पष्ट किया गया कि सरकार का संकल्प है कि वनांचल का प्रत्येक परिवार शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सम्मानजनक जीवन से जुड़े। आदिवासी समाज के उत्थान के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य आर्थिक सशक्तिकरण के साथ-साथ सामाजिक सम्मान सुनिश्चित करना है। वक्ताओं ने कहा कि जब तक अंतिम व्यक्ति तक विकास की रोशनी नहीं पहुंचेगी, तब तक प्रयास जारी रहेंगे।
घर वापसी करने वाले परिवारों ने कहा कि वे समाज की एकता और आपसी भाईचारे को मजबूत करेंगे। उन्होंने इसे अपने पूर्वजों की परंपराओं से पुनः जुड़ने का अवसर बताया। समारोह में पारंपरिक गीत-संगीत और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से आदिवासी विरासत को प्रदर्शित किया गया, जिससे पूरा वातावरण उत्साह और भावनात्मक ऊर्जा से भर गया।
इस अवसर पर आदिवासी समाज के वरिष्ठजन, भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इसे सांस्कृतिक अस्मिता, सामाजिक समरसता और आत्मगौरव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
कुल्हीडोंगरी का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सांस्कृतिक चेतना, सामाजिक एकता और विकास के प्रति सामूहिक प्रतिबद्धता का प्रतीक बनकर सामने आया है। वनांचल के जनजातीय परिवार अपनी परंपराओं से पुनः जुड़ते हुए विकास की मुख्यधारा में सहभागी बन रहे हैं—यही इस पहल का मूल उद्देश्य बताया गया।

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