कबीरधाम जिले के ग्राम घुघरीकला में सोमवार को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने सामाजिक विकास और पर्यावरणीय चेतना को मजबूत करने वाले दो महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में भाग लिया। उन्होंने पटेल समाज के नव निर्मित सामुदायिक भवन का लोकार्पण किया और मिनी स्टेडियम परिसर में पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत सामुदायिक भवन के लोकार्पण से हुई, जहां उन्होंने फीता काटकर और पूजा-अर्चना कर भवन को जनता को समर्पित किया। इस अवसर पर कृषक कल्याण परिषद अध्यक्ष सुरेश चंद्रवंशी, जिला पंचायत अध्यक्ष ईश्वरी साहू, उपाध्यक्ष कैलाश चंद्रवंशी, जिला पंचायत सदस्य रामकुमार भट्ट, कलेक्टर गोपाल वर्मा, जनपद पंचायत अध्यक्ष, पंचायत प्रतिनिधि, समाज के वरिष्ठजन, युवक-युवतियां और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन उपस्थित रहे।अपने संबोधन में उप मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सामुदायिक भवन केवल पटेल समाज के लिए नहीं, बल्कि पूरे गांव के लिए एक उपयोगी और समर्पित मंच होगा। उन्होंने कहा कि सरकार समाज के हर वर्ग की गरिमा, पहचान और आवश्यकताओं को प्राथमिकता दे रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे भवन सामाजिक एकता और सामूहिक आयोजनों के लिए अत्यंत उपयोगी होते हैं।
उन्होंने कहा, “पटेल समाज का योगदान कृषि, सामाजिक सरोकारों और जनजीवन में सदैव प्रेरणादायी रहा है। यह भवन नई पीढ़ी को सकारात्मक दिशा देगा।”
ग्रामीणों ने भवन निर्माण के लिए आभार व्यक्त किया, वहीं स्थानीय समस्याओं को भी उनके समक्ष रखा गया, जिन पर उन्होंने तत्परता से संज्ञान लेते हुए अधिकारियों को जरूरी कार्यवाही के निर्देश दिए।इसके पश्चात उप मुख्यमंत्री ने ग्राम के मिनी स्टेडियम परिसर में आम, नीम और अर्जुन जैसे पौधों का रोपण किया। उन्होंने युवाओं, ग्रामीणों और स्कूली बच्चों को संबोधित करते हुए कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक असंतुलन जैसी चुनौतियों से निपटने का एकमात्र उपाय अधिकाधिक वृक्षारोपण है।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे अपने गांव, स्कूल और सार्वजनिक स्थानों पर पौधरोपण को जनआंदोलन बनाएं और हर पौधे की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने सुझाव दिया कि मिनी स्टेडियम को केवल खेल गतिविधियों तक सीमित न रखते हुए इसे सांस्कृतिक, सामाजिक और पर्यावरणीय आयोजनों का भी केंद्र बनाया जाए।
कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सरपंच, पंचायत सचिव, शिक्षक, स्कूली छात्र-छात्राएं और बड़ी संख्या में ग्रामीणजन मौजूद थे। सभी को पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई।
यह यात्रा सामाजिक समरसता, पर्यावरणीय चेतना और ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में एक सशक्त पहल के रूप में याद की जाएगी।


