वनांचल में पहली बार: ग्राम पंचायत आगरपानी के आश्रित फिफलीपानी में ‘चप्पल चकरी’ प्रतियोगिता की धूम, पारंपरिक नवाचार से सजेगा आयोजन

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वनांचल में पहली बार: ग्राम पंचायत आगरपानी के आश्रित फिफलीपानी में ‘चप्पल चकरी’ प्रतियोगिता की धूम, पारंपरिक नवाचार से सजेगा आयोजन
आगरपानी/छत्तीसगढ़: सुदूर वनांचल के शांत और सुंदर परिवेश में बसे ग्राम पंचायत आगरपानी के आश्रित ग्राम फिफलीपानी में एक अनोखा खेल आयोजन होने जा रहा है। गांव के इतिहास में पहली बार ‘चकरी प्रतियोगिता’ का आयोजन किया जा रहा है, जो स्थानीय बच्चों और युवाओं के बीच कौतूहल और उत्साह का विषय बना हुआ है।
क्या है चप्पल से बनी चकरी?
इस प्रतियोगिता की सबसे बड़ी खासियत इसमें इस्तेमाल होने वाली ‘चकरी’ है। यह बाजार में मिलने वाली प्लास्टिक या धातु की चकरी नहीं, बल्कि ग्रामीणों की अपनी रचनात्मकता का नमूना है। इसे चप्पल के बेकार टुकड़ों को काटकर और तराशकर बनाया जाता है। वनांचल क्षेत्रों में यह एक पारंपरिक घरेलू खिलौना रहा है, जिसे अब एक प्रतिस्पर्धी खेल का रूप दिया जा रहा है।
आयोजन के मुख्य आकर्षण:
नवाचार: बेकार पड़ी चप्पलों का पुन: उपयोग (Recycle) कर खेल सामग्री बनाना।
परंपरा का संरक्षण: आधुनिक गैजेट्स के दौर में मिट्टी से जुड़े पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देना।
सामुदायिक उत्साह: पहली बार हो रहे इस बड़े आयोजन के लिए पिपली पानी के ग्रामीणों में भारी उत्साह है।
यह आयोजन न केवल मनोरंजन का साधन बनेगा, बल्कि सुदूर वनांचल की उस रचनात्मकता को भी सामने लाएगा जो अक्सर शहरों की चकाचौंध से दूर कहीं छिपी रहती है।

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