कुकदूर क्षेत्र में अवैध महुआ शराब की खुलेआम हो रही बिक्री
स्थानीय स्वास्थ्य, समाज और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर खतरा
जिम्मेदार विभाग के अधिकारी नदारद, कार्रवाई शून्य
छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले का पंडरिया विकासखंड प्राकृतिक सौंदर्य और जनजातीय संस्कृति के लिए पुरे प्रदेश में प्रसिद्ध है, लेकिन हाल के वर्षों में यहां एक गंभीर सामाजिक संकट तेजी से फैल रहा है। कुकदूर और इसके आसपास के वनांचल गांवों में महुए की अवैध शराब का निर्माण और बिक्री अब एक कुटीर उद्योग का रूप ले चुका है। शासन की अनदेखी और विभागीय अधिकारीयों की निष्क्रियता के चलते यह व्यापार न केवल युवाओं के भविष्य को अंधकार में धकेल रहा है, बल्कि समाज की मूल संरचना को भी खोखला कर रहा है।
गांव-गांव में शराब निर्माण, बाजार में खुलेआम बिक्री
कुकदूर, पोलमी, भेड़ागढ़, भैंसाडबरा, डालामौहा, माठपुर आगरपानी, कोदवागोदान, मझौलीरंवन, कामठी, नेउर, दंमगढ़, कुशयारी, बदना, उपका जैसे दर्जनो गांवों में हर घर में महुए की शराब
बनाई जा रही है। ग्रामीण हाट-बाजारों में का शराब 100रू प्रति चीतल की दर से बिना किसी डर के बेची जा रही है। यह गतिविधि अब पारंपरिक उपयोग से बहुत आगे निकल चुकी है और इसे संगठित बिजनेस का स्वरूप मिल चुका है।
अधिकारी नदारद, कार्यवाही शून्य
पंडरिया तहसील में आबकारी विभाग में अधिकारी की तैनाती तो है, पर क्षेत्र की अधिकांश जनता उन्हें जानती तक नहीं। कारण है. अधिकारियों की क्षेत्र में उपस्थिति नहीं होना और शून्य स्तर की कारवाई। क्षेत्र में अब तक अवैध शराब के
विरुद्ध कोई प्रभावी कारई सामने नहीं आई है। आरोप है कि अधिकारी केवल खानापूर्ति और बसूली में लगे हैं, जबकि मध्यप्रदेश बार्डर से भी शराब व गांजा की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है।
यूरिया मिलाकर बनाई जा रही जहरीली शराब
स्थानीय लोग पारंपरिक तरीके से शराब बनाने में 7 दिनों तक महुआ को पानी में डुबोकर रखते हैं, लेकिन जल्द मुनाफा कमाने की लालच में कुछ लोग यूरिया खाद मिलाकर जहरीली शराब तैयार कर रहे हैं। इससे लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। कई ग्रामीणों को
पेट, लीवर और मानसिक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। स्वास्थ्य और कानून-व्यवस्था पर संकट
क्षेत्र में पहले से ही एक वैध शराब दुकान मौजूद है, बावजूद इसके अवैध कारोब्बर जोरों पर है। इससे यह साफ होता है कि आबकारी विभाग और पुलिस की मिलीभगत गा लापरवाही इस पूरे तंत्र को बढ़ावा दे रही है। अवैध शराब से युवाओं का भविष्य खतरे में पड़ रहा है और घरेलू हिंसा, अपराध और नता जैसे सामाजिक बुरयमों में इजाफा हो रहा है।
प्रशासन से तत्काल कारर्वाई की मांग
स्थानीय जनता, क्षेत्र के समाजसेवी एवं जागरूक नागरिकों की ओर से शासन प्रशासन से यह मांग की जा रही है कि अवैध शराब पर रोक लगाने हेतु विशेष अभियान चलाया जाए। साथ ही दोषियों पर कड़ी कानूनी कारवाई हो, और ग्रामीणों को वैकल्पिक आजीविका जैसे कृषि, पशुपालन, लघु उद्योग की और प्रेरित किया जाए। यदि समय रहते इस पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो यह समस्या आने वाले समय में एक बड़े सामाजिक संकट का रूप ले सकती है।


