पंडरिया विकासखण्ड अंतर्गत ठेंगाटोला स्कूल में तालेबंदी, विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बच्चों का भविष्य दांव पर

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पंडरिया विकासखण्ड अंतर्गत ठेंगाटोला स्कूल में तालेबंदी, विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा बच्चों का भविष्य दांव पर
पंडरिया विकासखण्ड (11 सितम्बर 2025)सरकार जहाँ करोड़ों रुपए खर्च कर विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समाज के बच्चों के भविष्य को सँवारने का दावा करती है, वहीं ज़मीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है।
ठेंगाटोला प्राथमिक शाला, पंचायत कांदावानी (संकुल नेऊर) का हाल ये है कि 11 सितम्बर 2025 को दोपहर 12:26 बजे शैक्षिक समन्वयक के निरीक्षण में स्कूल बंद मिला। रसोइया, स्वीपर और ग्रामीणों से पूछताछ में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए—प्रभारी प्रधान पाठक श्री मोहित धुर्वे केवल सप्ताह में एक दिन स्कूल आते हैं और वह भी महज हस्ताक्षर करने।
दूसरे शिक्षक श्री हेमंत कुमार साहू एक-एक दिन के अंतराल पर पहुँचते हैं।
रसोइया बच्चों को मध्यान्ह भोजन कराकर स्कूल की छुट्टी कर देता है।
20 छात्र और 19 छात्राओं वाला यह विद्यालय वास्तव में बच्चों को शिक्षा देने के बजाय औपचारिकता का अड्डा बन गया है।
गंभीर आरोप शैक्षिक समन्वयक पर भी!

ग्रामवासियों ने बताया कि समन्वयक को सब जानकारी होते हुए भी वह मिलीभगत से कार्रवाई टालते हैं। कई बार प्रतिवेदन तैयार करने के बावजूद उन्हें उच्च कार्यालय तक नहीं भेजा गया। सूत्रों के अनुसार समन्वयक अपने चहेते शिक्षकों को पहले से सूचना देकर निरीक्षण करते हैं और बच्चों की हाज़िरी का आंकड़ा 10 से 50 तक बढ़ाकर भेजते हैं। सवाल यह है कि जब निरीक्षण की जवाबदारी समन्वयक की है तो फिर यह खुला खेल कौन-सी नीयत से चल रहा है?
ग्रामीणों की मांग
अनुपस्थित रहने वाले शिक्षकों पर कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई हो।

 

मिलीभगत करने वाले समन्वयक की भी भूमिका की जाँच की जाए।बैगा समाज के बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को बख्शा न जाए। सरकार यदि अब भी नहीं चेती तो यह बैगा बाहुल्य पहाड़ी क्षेत्र का अगली पीढ़ी तक अशिक्षा के अंधेरे में धकेलने जैसा होगा। पाँचवीं तक पढ़ाई करने वाले बच्चे छठवीं तक नहीं पहुँच पा रहे हैं, और यह किसी शिक्षक की लापरवाही नहीं, बल्कि सुनियोजित शिक्षा हत्या है।

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