कबीरधाम जिले में डिजिटल पारदर्शिता की नई शुरुआत क्यूआर कोड से अब हर ग्राम पंचायत के कार्यों की मिलेगी जानकारी
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सुशासन नीति और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में ऐतिहासिक पहल 468 ग्राम पंचायतों में क्यूआर कोड से उपलब्ध होगी मनरेगा कार्यों की पूरी जानकारी
कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा बोले – जवाबदेही प्रशासन की दिशा में क्रांतिकारी कदम
कवर्धा, । छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिला प्रशासन ने पारदर्शिता और जवाबदेही की दिशा में शासन के निर्देशों को तेजी से अमल में लाया है। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के कुशल निर्देशन में डिजिटल इंडिया की तर्ज पर जिले में एक ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है। अब कविरधाम जिले की सभी 468 ग्राम पंचायतों में महत्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत किए गए कार्यों की जानकारी आम ग्रामीण सीधे क्यूआर कोड स्कैन कर प्राप्त कर सकेंगे।
यह पहल मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की सुशासन नीति और उप मुख्यमंत्री, गृह एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन का परिणाम है, जिसका उद्देश्य ग्रामीणों को योजनाओं से संबंधित हर जानकारी सरल, त्वरित और पारदर्शी रूप से उपलब्ध कराना है।
क्यूआर से कैसे मिलेगी जानकारी
जिला प्रशासन द्वारा सभी ग्राम पंचायतों और प्रमुख स्थानों पर क्यूआर कोड चस्पा किए जा रहे हैं। इस क्यूआर कोड को हर नागरिक अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करेगा सकेगा। उसके मोबाइल में उस ग्राम पंचायत के विगत 3 वर्षों के सभी कार्यों की सूची खुल जाएगी। जानकारी सीधे नरेगा सॉफ्ट सर्वर से जुड़ी होगी, जिससे डेटा पूरी तरह प्रमाणिक और वास्तविक होगा।
क्या-क्या जानकारी मिलेगी क्यूआर कोड से
क्यूआर कोड से ग्राम पंचायत में हुए निर्माण कार्यों का पूरा ब्यौरा मिलेगा। मजदूरी भुगतान एवं सामग्री भुगतान की स्थिति की जानकारियां मिलेगी। रोजगार पाने वाले मजदूरों की संख्या की जानकारियां होगी।परिसंपत्तियों एवं आधारभूत ढांचे के निर्माण की जानकारी रहेंगी। कार्यों से जुड़ी अन्य वित्तीय एवं भौतिक जानकारी होगी। साथ ही नागरिकों के लिए टोल फ्री नंबर भी उपलब्ध रहेगा।
ग्रामीणों को होने वाला सीधा लाभ
कबीरधाम जिले में वर्तमान में 4,35,035 से अधिक ग्रामीण मनरेगा योजना में पंजीकृत हैं। अब तक उन्हें कार्यों से संबंधित केवल निर्माण स्थल पर लगे नागरिक सूचना पटल से सीमित जानकारी मिलती थी। लेकिन अब कोई भी ग्रामीण या उनका परिवारजन मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेगा। उन्हें जानकारी लेने के लिए न जनपद पंचायत जाना होगा और न जिला कार्यालय। पारदर्शिता के साथ-साथ ग्रामीणों का समय और संसाधन दोनों की बचत होगी। योजना की जवाबदेही सीधे जनता के हाथों में होगी।