पंडरिया ब्लॉक अंतर्गत पंडित दीनदयाल छात्रावास कोदवा गोडान विवादों में : वनवासी बच्चों से मारपीट, मोहन भागवत का प्रवास स्थल अब सवालों के घेरे में
कोदवा गोडान के निजी संस्था द्वारा संचालित बालक छात्रावास जो कभी पूरे जिले में आदर्श संस्कार एवम शिक्षा केंद्र माना जाता था और जिसकी तारीफ करते बड़े बड़े प्रशासनिक अधिकारी भी नहीं थकते थे,आज उसकी स्थिति एकदम विपरीत दिखाई दे रही है जहां क्या चल रहा है? कोई देखने वाला नहीं!
आज वहां रहने वाले बच्चों में न कोई अनुशासन है न कोई संस्कार और न ही कोई नियम ! शिक्षा की स्थिति भी बदतर हो गई है!
यहां के गैर जिम्मेदार प्रभारी के चलते कौन छात्र स्कूल गया,कौन घर गया अथवा कौन इधर उधर घूम रहा है इसे देखने वाला कोई नहीं है?
अनुशासन और संस्कार के अभाव से छात्रावासी बच्चे आपस एक दूसरे से लड़ते झगड़ते और गंदी गालियां देते देखे जा सकते हैं ! कुछ बच्चे गांव में घूमते नजर आते हैं ,कुछ शाला जाने के नाम पर घर चले जाते हैं!कोचिंग की भी कोई व्यवस्था नहीं है ! कभी जिस संस्था से निकले अनेक छात्र आज आर एस एस के विस्तारक प्रचारक और समाज के विभिन्न क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान और योगदान के लिए जाने जाते हैं वहीं बीते वर्षों में एक भी छात्र ऐसा नहीं दिखाई दे रहा है जिस पर गर्व किया जा सके!
वनवासी बच्चों की शिक्षा और संस्कार का मंदिर कहलाने वाला दीनदयाल छात्रावास, कोदवागोडान (विकासखंड पंडरिया) इन दिनों गंभीर आरोपों की जद में है। दीनदयाल वनवासी सेवा संस्थान द्वारा संचालित यह छात्रावास अर्धशासकीय संस्था है, जिसे शासन से आर्थिक और संरचनात्मक सहयोग मिलता है।