कबीरधाम में महारानी दुर्गावती की प्रतिमा खंडित, आदिवासी समाज ने जताया तीव्र आक्रोश
कबीरधाम। जिला मुख्यालय में स्थापित गोंडवाना साम्राज्य की वीरांगना महारानी दुर्गावती की प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षतिग्रस्त किए जाने की घटना ने जिले भर के आदिवासी समाज को उद्वेलित कर दिया है। घटना को आदिवासी अस्मिता, इतिहास और गौरव पर सीधा प्रहार बताया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार अज्ञात तत्वों ने देर रात प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया, जिसकी सूचना मिलते ही समाज के लोग मौके पर पहुंचे और विरोध जताया। समाज के वरिष्ठजनों ने कहा कि महारानी दुर्गावती त्याग, साहस और स्वाभिमान की प्रतीक हैं। उन्होंने मुगल साम्राज्य के विरुद्ध संघर्ष कर आदिवासी और गोंडवाना की मर्यादा को कायम रखा। ऐसे महान व्यक्तित्व की प्रतिमा के साथ छेड़छाड़ अत्यंत निंदनीय और दुर्भाग्यपूर्ण है।
घटना के विरोध में 25 फरवरी 2026, बुधवार को सुबह 11:00 बजे स्थानीय आदिवासी मंगल भवन में आपात बैठक आयोजित की गई है। बैठक के पश्चात एक विशाल रैली के माध्यम से पुलिस अधीक्षक एवं कलेक्टर कबीरधाम को ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन में दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी, कठोर दंड, प्रतिमा की मरम्मत एवं सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की जाएगी।
आदिवासी समाज के पदाधिकारियों ने जिले के सभी आदिवासी संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, मातृशक्ति, पितृशक्ति, युवा एवं युवती शक्ति से अधिक से अधिक संख्या में उपस्थित होकर एकजुटता प्रदर्शित करने का आह्वान किया है। समाज ने स्पष्ट किया है कि यह आंदोलन शांतिपूर्ण एवं लोकतांत्रिक तरीके से किया जाएगा, लेकिन यदि प्रशासन द्वारा उचित कार्रवाई नहीं की गई तो आगे की रणनीति बनाई जाएगी।
वहीं, प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा संदिग्धों की तलाश की जा रही है तथा आसपास के क्षेत्रों की निगरानी बढ़ा दी गई है।
कबीरधाम जिले में इस घटना के बाद सामाजिक और राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। आदिवासी समाज का कहना है कि यह समय एकजुट होकर अपनी विरासत और सम्मान की रक्षा करने का है।