कुकदूर क्षेत्र अंतर्गत मंगलवार को ढोलढोली रपटा से पानी ऊपर बहने के कारण आवागमन बंद रहा,भारी बारिश से आगरनदी में बाढ़, कुकदूर क्षेत्र के 12 गांवों का संपर्क टूटा
कुकदूर क्षेत्र अंतर्गत मंगलवार को ढोलढोली रपटा पर पानी बहने के कारण आवागमन बंद रहा भारी बारिश से आगर नदी में बाढ़, रपटा पर चढ़ा पानी, कुकदूर क्षेत्र के 12 गांवों का संपर्क टूटा
मानसून सीजन में 648.7 मिमी बारिश, जो पिछले साल से 97.5 कम, 2024 में 746.2 मिमी बरसे थे बादल
कबीरधाम जिले के वनांचल क्षेत्र में भारी बारिश का दौर जारी है। वनांचल व पहाड़ी क्षेत्र में बारिश होने के कारण यहां से निकलने वाले नदी-नाले उफान पर है। स्थिति ऐसी है कि कुकदूर क्षेत्र के दर्जनभर छोटे-छोटे पुलिया के ऊपर से बाढ़ का पानी जा रहा है। यहीं कारण है कि कुकदूर क्षेत्र के दर्जनभर गांव का संपर्क टूट रहा है।
कुई से सेंदूरखार मार्ग स्थित ढोलढोली के पास आगर नदी पर बने रपटा में बाढ़ का पानी आ रहा है। यहां पानी आने के कारण दोनों ओर के गांव का संपर्क टूट रहा है।
कुकदूर क्षेत्र अंतर्गत मंगलवार को ढोलढोली रपटा पर पानी बहने के कारण आवागमन बंद रहा।
रपटा की ऊंचाई कम, बड़ा पुल निर्माण की मांग
इस कारण ग्राम ढोलढोली, सेजाडीह, भाकुर, देवानपटपर, छीदिडीह, तेलियापानी धोबे, पीपरटोला, सारपानी, सईटोला, सेंदूरखार समेत दर्जनभर गांव का कुकदूर तहसील व पंडरिया ब्लॉक मुख्यालय से संपर्क टूट रहा है। पहाड़ी क्षेत्र में बारिश हो रही। ऐसे में बारिश का पानी मैदानी क्षेत्र के नदी, नालों में अचानक से आ जाता है। मंगलवार को ढोलढोली के बने रपटा में शाम के समय अचानक से पानी बढ़ गया, जिसके कारण यह बंद हो गया।
कबीरधाम जिले में वर्तमान मानसून सीजन में 648.7 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जो बीते साल की तुलना में 97.5 कम है। बीते साल 2024 में इसी तीन सितंबर की स्थिति में पूरे जिले में औसतन 746.2 मिमी बारिश दर्ज की गई थी। ग्रामीणों ने बताया कि ढोलढोली में रपटा का निर्माण वर्ष 2010-11 के समय में सड़क निर्माण के दौरान किया गया था। ऊंचाई कम होने
के कारण यहां बाढ़ का पानी आ जाता है। वर्तमान बारिश सीजन के दौरान 4 से 5 बार ऐसी स्थिति आ चुकी है, जिसमें रपटा के ऊपर से पानी बहा है। ग्रामीण इस जगह पर बड़े पुल की कई बार निर्माण की मांग कर चुके है। इसके बाद भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता है। रपटा में अचानक से बाढ़ का पानी आने के कारण लोग भी आना-जाना करने से बच रहे है।
ज्यादा बारिश से दलहन व तिलहन को होगा नुकसान
जिले में हो रहीं बारिश से धान व गत्रा के फसल को फायदा है। इस साल पूरे जिले में करीब 1.10 लाख हेक्टेयर में धान व 32 हजार हेक्टेयर में गन्ना की फसल लगाए जाने का अनुमान है। इसी प्रकार कई किसान दलहन व तिलहन, उद्यानिकी की खेती कर रहे है। इन तीनों फसल को ज्यादा बारिश से नुकसान है। कृषि विज्ञान केन्द्र (केवीके) प्रमुख डॉ. बीपी त्रिपाठी ने बताया कि दलहन, तिलहन उद्यानिकी के फसल को ज्यादा बारिश से नुकसान हो सकता है। खेत में ज्यादा समय तक पानी रूकेगा तो खतरा है। इसके अलावा इन फसल में कीट की समस्या आ रही है। किसानों से अपील है कि वे कीट के रोकथाम के लिए अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी से संपर्क कर दवाई का छिड़काव जरूर करें। बुधवार को ग्रामीण अंचल के दौरे के दौरान कई जगह में कीट की समस्या दिखाई दी है।
कबीरधाम जिले में इस सीजन बारिश की स्थिति बारिश से शिक्षक भी परेशान ढोलढोली के रपटा में बारिश का पानी उद्यानिकी के फसल को ज्यादा बारिश से नुकसान हो सकता है। खेत में ज्यादा समय तक पानी रूकेगा तो खतरा है। इसके अलावा इन फसल में कीट की समस्या आ रही है। किसानों से अपील है कि वे कीट के रोकथाम के लिए अपने क्षेत्र के कृषि अधिकारी से संपर्क कर दवाई का छिड़काव जरूर करें। बुधवार को ग्रामीण अंचल के दौरे के दौरान कई जगह में कीट की समस्या दिखाई दी है।
आ जाने के कारण क्षेत्र के शिक्षक भी परेशान है। प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक स्कूलों में पढ़ाने वाले शिक्षकों ने बताया कि सुबह स्कूल आने के दौरान रपटा में पानी नहीं रहता। लेकिन, जब शाम को वापस जाते है तो यहां कई बार बारिश का पानी रपटा के ऊपर रहता है। ऐसे में हम घर कब तक पहुंचेंगे, इसकी कोई गारंटी नहीं रहती। पानी का तेज बहाव होने से आवागमन दोनों तरफ रूक जाता है। यहां पर बड़े पुल निर्माण की जरूरत है।