शिक्षक रघुनंदन गुप्ता ने स्कूली बच्चों के साथ अनोखे अंदाज में मनाया अपना जन्मदिन

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शिक्षक रघुनंदन गुप्ता ने स्कूली बच्चों के साथ अनोखे अंदाज में मनाया अपना जन्मदिन
शिक्षा को समाज की सेवा का माध्यम मानने वाले शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नहीं, बल्कि जीवन जीने के संस्कार भी सिखाते हैं। ऐसा ही कुछ कर दिखाया है पंडरिया ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले रघुनंदन गुप्ता, शासकीय माध्यमिक शाला कामठी के शिक्षक ने। उन्होंने अपने जन्मदिवस के अवसर पर किसी भव्य आयोजन या निजी उत्सव के बजाय, प्राथमिक शाला कमरा खोल के जरूरतमंद बच्चों के बीच पहुँचकर खुशियाँ बांटीं।
दिखावे से दूर, बच्चों के चेहरे पर बिखेरी मुस्कान
वर्तमान समय में जहाँ लोग अपने जन्मदिन पर महंगे होटलों और पार्टियों में हजारों रुपये खर्च कर देते हैं, वहीं शिक्षक रघुनंदन गुप्ता ने एक सराहनीय पहल की। उन्होंने अपने जीवन के इस विशेष दिन को प्राथमिक शाला कमरा खोल के नन्हे-मुन्ने बच्चों के साथ बिताने का निर्णय लिया। इस दौरान उन्होंने स्कूल के गरीब और जरूरतमंद बच्चों को पेंसिल, रबर, कटर और अन्य शैक्षणिक सामग्री वितरित की।
उपहार पाकर बच्चों के चेहरे खिल उठे। बच्चों के लिए यह केवल स्टेशनरी का वितरण नहीं था, बल्कि उनके शिक्षक द्वारा दिया गया स्नेह और प्रोत्साहन था।
शिक्षक ने स्कूली बच्चों के साथ मनाया जन्मदिन; उपहार पाकर खिले बच्चों के चेहरे
शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक न केवल ज्ञान का प्रकाश फैलाते हैं, बल्कि अपने नेक कार्यों से समाज के सामने मिसाल भी पेश करते हैं। ऐसा ही एक सराहनीय उदाहरण पंडरिया ब्लॉक के अंतर्गत देखने को मिला, जहाँ रघुनंदन गुप्ता शासकीय माध्यमिक शाला कामठी में पदस्थ शिक्षक ने अपना जन्मदिन सादगी और सेवा भाव के साथ मनाया।
शिक्षक ने अपने जन्मदिवस के अवसर पर प्राथमिक शाला कमरा खोल के बच्चों के बीच पहुँचकर खुशियाँ बांटीं। इस खास मौके पर उन्होंने विद्यालय के जरूरतमंद बच्चों को पेंसिल, रबर, कटर और अन्य शिक्षण सामग्री सप्रेम भेंट की।
अचानक मिले इन उपहारों को पाकर बच्चों के चेहरे खुशी से खिल उठे। शिक्षक के इस आत्मीय व्यवहार और पहल की पालकों सहित स्थानीय ग्रामीणों ने काफी प्रशंसा की है। शिक्षक ने बताया कि बच्चों की मुस्कान ही उनके जन्मदिन का सबसे बड़ा उपहार है और वे चाहते थे कि यह दिन उनके शिक्षण कार्य से जुड़े बच्चों के लिए यादगार बने।
इस अवसर पर स्कूल के अन्य स्टाफ और बच्चे उपस्थित रहे, जिन्होंने शिक्षक को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं।

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