नंदनी कुमान में 5 बैगा आदिवासी बच्चों की मौत से हड़कंप, 16 बच्चे अस्पताल में भर्ती; कृष्णा पूसाम ने उठाया स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
कवर्धा। कबीरधाम जिले के बैगा आदिवासी बाहुल्य गांव नंदनी कुमान में पिछले कुछ महीनों के दौरान पांच बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों का अब तक पता नहीं चल पाया है। वहीं, करीब 16 बच्चों को स्वास्थ्य जांच और उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में भर्ती कराया गया है। मामले को लेकर आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश सचिव कृष्णा पूसाम ने मुद्दा उठाते हुए स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं।
एक ही गांव में पांच बच्चों की मौत और अन्य बच्चों के बीमार होने की जानकारी सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग एवं प्रशासन हरकत में आया है। विभागीय टीमें गांव में पहुंचकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच कर रही हैं। साथ ही घर-घर जाकर परिवारों से जानकारी जुटाई जा रही है, ताकि बीमार बच्चों की पहचान कर समय पर उपचार उपलब्ध कराया जा सके।
### स्वास्थ्य शिविर लगाकर बच्चों की जांच
मामले की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने नंदनी कुमान में स्वास्थ्य शिविर आयोजित किया। इस दौरान बच्चों की जांच की गई और करीब 16 बच्चों को उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बोड़ला में भर्ती कराया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की निगरानी में बच्चों का इलाज जारी है।
स्वास्थ्य विभाग की टीमें गांव में घर-घर जाकर बच्चों की सेहत, बीमारी के लक्षण और स्वास्थ्य संबंधी अन्य जानकारियां जुटा रही हैं। विभाग का प्रयास है कि किसी भी बच्चे की हालत गंभीर होने से पहले उसकी पहचान कर आवश्यक उपचार दिया जा सके।
### महिला एवं बाल विकास विभाग ने भी शुरू किया सर्वे
बच्चों की मौत के मामले को गंभीरता से लेते हुए महिला एवं बाल विकास विभाग की टीम भी गांव पहुंची है। विभाग के अधिकारी आनंद तिवारी अपनी टीम के साथ घर-घर जाकर बच्चों के स्वास्थ्य, पोषण और परिवारों से संबंधित जानकारी एकत्र कर रहे हैं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, मृत बच्चों की उम्र लगभग डेढ़ से दो वर्ष तथा पांच से सात वर्ष के बीच बताई जा रही है। हालांकि, बच्चों की मौत किसी बीमारी, संक्रमण, कुपोषण या अन्य कारण से हुई है, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मौतों की वास्तविक वजह चिकित्सकीय जांच और संबंधित रिपोर्ट सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
### कृष्णा पूसाम ने उठाया मुद्दा, स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल
इस मामले में आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश सचिव कृष्णा पूसाम ने आवाज उठाते हुए बैगा आदिवासी बाहुल्य गांव में बच्चों की लगातार हो रही मौतों को गंभीर चिंता का विषय बताया है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए और मामले की गंभीरता से जांच कराए जाने की जरूरत पर जोर दिया।
वहीं, आदिवासी नेता कामू बैगा ने भी शासन-प्रशासन से जवाबदेही तय करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। इस घटना ने आदिवासी बहुल एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता, बच्चों के पोषण और समय पर इलाज जैसी व्यवस्थाओं को लेकर चर्चा तेज कर दी है।
हालांकि, जांच पूरी होने से पहले बच्चों की मौत के लिए किसी विभाग या बीमारी को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं होगा। आवश्यक है कि मौतों के कारणों का पता लगाने के साथ यह भी जांच की जाए कि प्रभावित परिवारों को समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल पाईं या नहीं।
### जांच रिपोर्ट का इंतजार, बच्चों के उपचार पर जोर
फिलहाल स्वास्थ्य विभाग और महिला एवं बाल विकास विभाग की टीमें गांव में सक्रिय हैं। एक तरफ अस्पताल में भर्ती बच्चों का उपचार किया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर घर-घर सर्वे के माध्यम से बच्चों की स्वास्थ्य स्थिति और पोषण संबंधी जानकारी जुटाई जा रही है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि नंदनी कुमान में पांच बच्चों की मौत किन परिस्थितियों में हुई और क्या गांव में बच्चों की बीमारी की पहचान समय रहते हो सकती थी। मामले की निष्पक्ष जांच, मौतों के कारणों का खुलासा और प्रभावित परिवारों को आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।
फिलहाल, बच्चों की मौत के कारणों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। जांच रिपोर्ट और स्वास्थ्य विभाग की विस्तृत जानकारी सामने आने के बाद ही पूरे मामले की