पंडरिया के जामुनटोला में वन अधिकार कानून पर कार्यशाला, आदिवासी समुदाय ने जंगल प्रबंधन का लिया संकल्प

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वन अधिकार कानून के क्रियान्वयन पर जामुनटोला में कार्यशाला, आदिवासी समुदाय ने जंगल प्रबंधन का लिया संकल्प
पंडरिया। वनांचल ग्रामों में वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन और आदिवासी समुदाय को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से आदिवासी समता मंच द्वारा 23 जुलाई 2026 को ग्राम जामुनटोला में कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें अजवाइनबांह, जामुनटोला, सरहापथरा सहित आसपास के गांवों से महिला-पुरुषों ने भाग लिया।
कार्यशाला के दौरान संस्था की अध्यक्ष इंदु नेताम ने अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) अधिनियम 2006, संशोधन 2007 एवं 2012 के प्रावधानों की सरल भाषा में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने वन अधिकार, सामुदायिक वन संसाधन अधिकार और व्यक्तिगत वन अधिकार से जुड़े विषयों को समझाते हुए पात्र लोगों को अपने अधिकारों के लिए जागरूक रहने की बात कही। संस्था से जुड़े मनोज बैगा ने भी वन अधिकार कानून के विभिन्न पहलुओं पर जानकारी साझा की।
कई परिवारों को अब तक नहीं मिला सामुदायिक वन संसाधन अधिकार
कार्यशाला में गांवों में वन अधिकार की स्थिति को लेकर चर्चा हुई। दसमीं बाई बैगा ने बताया कि अब तक सामुदायिक वन संसाधन अधिकार नहीं मिल पाया है, जबकि पूरे गांव का गुजर-बसर जंगल पर निर्भर है। जंगल से मिलने वाली वन उपज और प्राकृतिक संसाधन उनके जीवन का महत्वपूर्ण आधार हैं।
पनिहारिन बैगा ने बताया कि तेलियापानी पंचायत क्षेत्र में कई परिवारों को व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र नहीं मिल पाया है। उनका कहना है कि वे 25 वर्षों से अधिक समय से संबंधित भूमि पर काबिज हैं, जहां घर-बाड़ी बनाने के साथ खेती कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे हैं। अधिकार पत्र नहीं मिलने से शासन की विभिन्न सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी होती है। साथ ही जमीन पर भविष्य में वृक्षारोपण या अन्य कार्रवाई को लेकर भी लोगों में चिंता बनी रहती है।
लमनू बरतु बैगा और बिसाहू बैगा ने बताया कि विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए प्रावधानित पर्यावास (हैबिटाट) अधिकार भी अब तक प्राप्त नहीं हुआ है। इसके लिए पिछले तीन-चार वर्षों से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।
जंगल का भ्रमण कर तैयार करेंगे प्रबंधन प्लान
कार्यशाला के बाद प्रतिभागियों ने अपने सामुदायिक वन संसाधन और पर्यावास के प्रबंधन को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिया। इसके तहत जंगल का भ्रमण कर वहां मौजूद जैव विविधता, पेड़-पौधों, जड़ी-बूटियों और अन्य प्राकृतिक संसाधनों की पहचान एवं आकलन किया गया। भ्रमण के दौरान जंगल की स्थिति, उपलब्ध संसाधनों और स्थानीय जरूरतों को समझने पर भी चर्चा की गई।
तीनों गांवों के लोगों ने निर्णय लिया कि इसी माह अपने-अपने जंगल का भ्रमण पूरा किया जाएगा। इसके बाद पर्यावास एवं सामुदायिक वन संसाधन के संरक्षण, उपयोग और प्रबंधन को लेकर प्रबंधन प्लान तैयार किया जाएगा। कार्यशाला के माध्यम से वनांचल क्षेत्र के लोगों ने अपने पारंपरिक वन संसाधनों के संरक्षण के साथ-साथ वन अधिकारों को हासिल करने की दिशा में सामूहिक रूप से आगे बढ़ने का संकल्प लिया।

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