अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रहे 39 परिवार, अनुकंपा नियुक्ति के लिए पीड़ित परिवारों का सब्र टूटने की कगार पर

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अनुकंपा नियुक्ति के लिए भटक रहे 39 परिवार, अनुकंपा नियुक्ति के लिए पीड़ित परिवारों का सब्र टूटने की कगार पर
रायपुर/कबीरधाम। छत्तीसगढ़ में दिवंगत पंचायत शिक्षा कर्मियों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति दिलाने का मामला एक बार फिर तूल पकड़ता नजर आ रहा है। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के जिले में ही 39 पीड़ित परिवार पिछले ढाई साल से अनुकंपा नियुक्ति के लिए दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
पीड़ित परिवारों का आरोप है कि वे अब तक 40 से 50 बार जनप्रतिनिधियों और मंत्रियों से मुलाकात कर चुके हैं, लेकिन हर बार उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिला है। परिवारों का कहना है कि उपमुख्यमंत्री स्तर तक बात पहुंचने के बावजूद अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है।
प्रदेश प्रवक्ता प्रमोद चौबे ने बताया कि कांग्रेस शासनकाल में इस मांग को लेकर 307 दिनों तक बड़ा आंदोलन चला था। इस दौरान कई रैलियां निकाली गईं और एक महिला शांति साहू ने विरोध स्वरूप मुंडन तक कराया था। उस समय भाजपा के वरिष्ठ नेताओं—डॉ. रमन सिंह, बृजमोहन अग्रवाल, अरुण साव और ओपी चौधरी—ने आंदोलन स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया था और सरकार बनने पर अनुकंपा नियुक्ति देने का वादा किया था।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि सरकार बनने के बाद अब ढाई साल बीत चुके हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला। कई बार मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री सहित मंत्रियों से मुलाकात के बावजूद सिर्फ “जल्द नियुक्ति मिलेगी” का आश्वासन ही मिलता रहा।
प्रदेश अध्यक्ष माधुरी मृगे के नेतृत्व में भी कई बार शासन-प्रशासन से बातचीत की गई, लेकिन कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया। अब पीड़ित परिवारों ने सख्त रुख अपनाते हुए ऐलान किया है कि वे उपमुख्यमंत्री के बंगले में धरना देंगे और जब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं दी जाएगी, वहां से नहीं हटेंगे।
परिवारों का कहना है कि वे कोई बड़ी मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी योग्यता के अनुसार तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरी चाहते हैं। उनका सवाल है कि जब वादा किया गया था तो अब न्याय मिलने में इतनी देरी क्यों हो रही है।
यदि जल्द ही सरकार की ओर से कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो पीड़ित परिवारों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह मुद्दा और गरमा सकता है।

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