पंडरिया ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कोदवागोड़न में कुम्हार समाज की शिकायत निकली भ्रामक, पटवारी जांच में खुला सच; पीएम आवास रोकने की कोशिश नाकाम

lok sev
previous arrow
next arrow
पंडरिया ब्लॉक अंतर्गत ग्राम कोदवागोड़न में कुम्हार समाज की शिकायत निकली भ्रामक, पटवारी जांच में खुला सच; पीएम आवास रोकने की कोशिश नाकाम
कवर्धा/पंडरिया ग्राम कोदवागोड़न में कुम्हार समाज द्वारा जमीन पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण को लेकर विधायक एवं जिला प्रशासन को दी गई शिकायत जांच में भ्रामक और तथ्यों से परे पाई गई है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि शासन द्वारा कुंभकार समाज को आवंटित भूमि पर अवैध रूप से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत मकान बनाया जा रहा है, जिससे समाज के 40 परिवारों की आजीविका प्रभावित होगी। लेकिन राजस्व विभाग की जांच और स्थल निरीक्षण में शिकायत के दावों की पोल खुल गई।
प्रशासन के निर्देश पर पटवारी द्वारा किए गए सीमांकन एवं दस्तावेजों की जांच में स्पष्ट हुआ कि जिस भूमि पर प्रधानमंत्री आवास का निर्माण किया जा रहा है, उसका कुम्हार समाज की मिट्टी खदान से कोई संबंध नहीं है। जांच में पाया गया कि विवादित स्थल साप्ताहिक बाजार के पास स्थित खसरा नंबर 374/2 पर है, जहां पूर्व में शासन का महिला कर्मचारी आवास था।
जानकारी के अनुसार लगभग 30-32 वर्ष पूर्व उक्त भवन जर्जर होने के बाद तत्कालीन ग्राम पंचायत ने बेहद गरीब और बेघर तुलसीराम पनरिया के परिवार को वहां रहने की अनुमति दी थी। तब से उनका परिवार उसी स्थान पर निवास कर रहा है। परिवार की आर्थिक स्थिति अत्यंत कमजोर है तथा वह डबलरोटी और कबाड़ बेचकर जीवनयापन करता है। शासन द्वारा पिछले वर्ष उनके नाम प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किया गया था।
ग्रामीणों का आरोप है कि कुछ लोगों ने व्यक्तिगत रंजिश के चलते बार-बार निर्माण कार्य रुकवाने का प्रयास किया। जब तुलसीराम ने पुनः आवास निर्माण शुरू किया तो जिला प्रशासन और विधायक को शिकायत देकर मामले को विवादित बनाने की कोशिश की गई।
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायत में 40 कुंभकार परिवारों के प्रभावित होने का दावा किया गया, जबकि गांव में इस समाज के केवल 10 से 12 परिवार ही निवास करते हैं। आरोप यह भी है कि आवेदन में कुछ ऐसे लोगों के हस्ताक्षर और अंगूठे के निशान शामिल किए गए हैं जिनकी मृत्यु पहले ही हो चुकी है या जिन्होंने शिकायत का समर्थन नहीं किया था।
पटवारी द्वारा सरकारी नक्शे और खसरा अभिलेखों के मिलान में स्पष्ट हुआ कि कुम्हार समाज को मिट्टी निकालने के लिए खसरा नंबर 141 में पहले से पर्याप्त भूमि उपलब्ध है। वहीं जिस भूमि पर पीएम आवास बन रहा है, उसके रिकॉर्ड में कहीं भी कुम्हार समाज के स्वामित्व या आवंटन का उल्लेख नहीं है।
स्थल निरीक्षण में यह भी पाया गया कि विवादित मकान के पश्चिम में तिवारी परिवार की भूमि तथा पूर्व में सार्वजनिक सुलभ शौचालय स्थित है। इसके आगे कुम्हार समाज की मिट्टी खदान मौजूद है, जो वर्षों की खुदाई के कारण डबरी का रूप ले चुकी है।
राजस्व विभाग की जांच के बाद स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो गई है। जांच रिपोर्ट के अनुसार तुलसीराम द्वारा बनाए जा रहे प्रधानमंत्री आवास का कुम्हार समाज की पुरानी मिट्टी खदान या उनके व्यवसाय से किसी प्रकार का संबंध नहीं है। प्रशासन की निष्पक्ष जांच के बाद पूरे मामले में सच्चाई सामने आने से भ्रामक शिकायतों पर सवाल खड़े हो गए हैं।

Related posts