उदका पंचायत में 15वें वित्त की राशि के आहरण पर सवाल, जांच की निष्पक्षता को लेकर शिकायतकर्ताओं में संशय
सरपंच-सचिव पर शासकीय राशि के दुरुपयोग का आरोप, उपसरपंच व पंचों ने की जांच की मांग; करीब 10 लाख रुपए के आहरण का मामला
पंडरिया/कबीरधाम। जनपद पंचायत पंडरिया के ग्राम पंचायत उदका में 15वें वित्त आयोग की राशि के आहरण और उसके उपयोग को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पंचायत के उपसरपंच महेन्द्र कुमार साहू सहित पंचों ने सरपंच श्रीमती ललिता मरकाम और पंचायत सचिव सीमा मार्को पर पंचायत की शासकीय राशि के कथित दुरुपयोग तथा पंचायत सदस्यों को विश्वास में लिए बिना राशि आहरित करने के आरोप लगाए हैं। मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग को लेकर शिकायत की गई है।
विकास कार्यों के नाम पर राशि आहरण का आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार ग्राम पंचायत में सड़क दुरुस्तीकरण, पंचायत भवन मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, हैंडपंप, बोर खनन, सीसी रोड निर्माण, नाली सफाई और स्वच्छता सहित विभिन्न कार्यों के नाम पर 15वें वित्त आयोग की राशि का आहरण किया गया। आरोप है कि दस्तावेजों में जिन कार्यों को कराया जाना बताया गया है, उनमें से कुछ कार्यों के वास्तविक रूप से होने और उनकी गुणवत्ता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है।
पंचों का कहना है कि पंचायत की आय-व्यय संबंधी जानकारी मांगे जाने के बावजूद उन्हें स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। इससे पंचायत की राशि के उपयोग में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
करीब 10 लाख रुपए के लेन-देन की जांच की मांग
शिकायत में करीब 10 लाख रुपए की राशि के आहरण का उल्लेख किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि 15वें वित्त की राशि से कराए गए सभी कार्यों का मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए। साथ ही भुगतान से संबंधित बिल, वाउचर, माप पुस्तिका, स्वीकृति आदेश और अन्य पंचायत अभिलेखों की जांच की जाए।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि दस्तावेजों में दर्शाए गए कार्य मौके पर नहीं पाए जाते हैं अथवा कार्यों में अनियमितता मिलती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए और शासकीय राशि की वसूली की जाए।
जांच दल पर दबाव की चर्चा, आधिकारिक पुष्टि नहीं
मामले की जांच जनपद पंचायत स्तर पर किए जाने की बात सामने आई है। इसी बीच स्थानीय स्तर पर जांच दल पर दबाव होने की चर्चा भी है। हालांकि दबाव संबंधी आरोपों की किसी अधिकारी या जांच दल की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि शिकायतकर्ताओं में जांच की निष्पक्षता को लेकर संशय बना हुआ है।
शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि जांच दल मौके पर पहुंचकर प्रत्येक कार्य का भौतिक सत्यापन करे और पंचायत के वित्तीय अभिलेखों की जांच स्वतंत्र एवं निष्पक्ष तरीके से की जाए।
तत्कालीन सचिव की भूमिका की भी जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने मामले में तत्कालीन पंचायत सचिव की भूमिका की जांच की मांग भी की है। उनका कहना है कि जिस अवधि में संबंधित राशि का आहरण हुआ और कार्यों से जुड़े दस्तावेज तैयार किए गए, उस अवधि में पदस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में लाई जानी चाहिए।
उनका कहना है कि जांच केवल वर्तमान पदाधिकारियों तक सीमित न रखी जाए, बल्कि संबंधित अवधि के सभी वित्तीय लेन-देन, भुगतान और विकास कार्यों से जुड़े अभिलेखों की जांच हो।
बिल-वाउचर और भुगतान अभिलेखों की जांच की मांग
शिकायत में पंचायत द्वारा कराए गए बताए जा रहे कार्यों के बिल, वाउचर, भुगतान अभिलेख और अन्य दस्तावेजों की जांच के साथ कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन कराने की मांग की गई है। शिकायतकर्ताओं ने आशंका जताई है कि यदि दस्तावेजों में दर्ज कार्य मौके पर नहीं पाए जाते हैं तो शासकीय राशि के दुरुपयोग की स्थिति सामने आ सकती है।
कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को भी शिकायत
मामले की शिकायत की प्रतिलिपि कलेक्टर कबीरधाम, मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत कबीरधाम और मुख्य कार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत पंडरिया को भी दी गई है। शिकायतकर्ताओं ने जांच पूरी होने तक संबंधित राशि के आगे के आहरण अथवा उपयोग पर रोक लगाने तथा जांच में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
अब पूरे मामले में जनपद पंचायत की जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। यदि जांच में वित्तीय अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई और शासकीय राशि की वसूली की कार्रवाई हो सकती है। वहीं आरोप प्रमाणित नहीं होने की स्थिति में वास्तविक स्थिति भी जांच रिपोर्ट से स्पष्ट हो जाएगी।