राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर कृष्णा पुसाम ने दी श्रद्धांजलि

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राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर कृष्णा पुसाम ने दी श्रद्धांजलि
पंडरिया। गोंडवाना के महान योद्धाओं एवं अमर शहीद राजा शंकर शाह जी और कुंवर रघुनाथ शाह जी के बलिदान दिवस के अवसर पर आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश सचिव कृष्णा पुसाम ने उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया। उन्होंने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान आदिवासी समाज के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उन्होंने अपने जल, जंगल, जमीन और स्वाभिमान की रक्षा के लिए अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान दिया, जिसे समाज कभी भुला नहीं सकता।
कृष्णा पुसाम ने कहा कि राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने अपने समय में अन्याय और अंग्रेजी शासन के खिलाफ साहस के साथ संघर्ष किया। उनका जीवन संघर्ष, त्याग और देशभक्ति की मिसाल है। उन्होंने कहा कि दोनों वीरों का बलिदान केवल इतिहास का एक अध्याय नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए साहस और स्वाभिमान की प्रेरणा है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान उसकी संस्कृति, परंपरा, प्रकृति और अपनी भूमि से गहराई से जुड़ी हुई है। राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह ने इन्हीं मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनके बलिदान ने समाज में अपने अधिकारों और सम्मान के लिए खड़े होने का संदेश दिया।
प्रदेश सचिव कृष्णा पुसाम ने कहा कि एक आदिवासी समाज के बेटे के रूप में वे महान योद्धाओं के संघर्ष और शौर्य को नमन करते हैं। उन्होंने कहा कि समाज के महापुरुषों और वीर शहीदों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाना सभी की जिम्मेदारी है। युवाओं को अपने इतिहास, संस्कृति और समाज के गौरवशाली व्यक्तित्वों के बारे में जानकारी हासिल करनी चाहिए, ताकि उनके त्याग और संघर्ष से प्रेरणा लेकर समाज के विकास में योगदान दिया जा सके।
उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि आदिवासी समाज शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के क्षेत्र में आगे बढ़े तथा अपनी समृद्ध संस्कृति और परंपराओं को भी संरक्षित रखे। महापुरुषों के बताए मार्ग पर चलकर समाज में एकता, जागरूकता और भाईचारे को मजबूत किया जा सकता है।
राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह के बलिदान दिवस पर कृष्णा पुसाम ने दोनों वीर शहीदों को कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि उनके सपनों और संघर्ष की भावना को आगे बढ़ाने के लिए वे सदैव कृतसंकल्पित हैं। उन्होंने आदिवासी समाज के लोगों से अपने गौरवशाली इतिहास को याद रखने और वीर शहीदों के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
अंत में उन्होंने कहा— “राजा शंकर शाह और कुंवर रघुनाथ शाह का बलिदान हम सभी के लिए अमर प्रेरणा है। उनके संघर्ष, शौर्य और स्वाभिमान को शत-शत नमन।”
जय आदिवासी, जय हिंद!

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