ग्राम पोलमी में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया श्रमिक दिवस: बोरे-बासी और मुनगा भाजी के साथ जीवंत हुई छत्तीसगढ़ी संस्कृति

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ग्राम पोलमी में पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया गया श्रमिक दिवस: बोरे-बासी और मुनगा भाजी के साथ जीवंत हुई छत्तीसगढ़ी संस्कृति
पोलमी (कबीरधाम): छत्तीसगढ़ की माटी की महक और यहां की समृद्ध परंपराओं का संगम आज ग्राम पंचायत पोलमी में देखने को मिला। आज दिनांक 1 मई 2026, दिन शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस के पावन अवसर पर सेक्टर पोलमी के अंतर्गत आने वाले ग्राम पोलमी में ‘बोरे-बासी’ तिहार बड़े ही हर्षोल्लास और पारंपरिक ढंग से मनाया गया। इस दौरान ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने एक साथ बैठकर छत्तीसगढ़ का गौरव कहे जाने वाले बोरे-बासी, चटनी और मुनगा भाजी का आनंद लिया।
परंपरा का सम्मान और श्रमिकों का गौरव
मुख्यमंत्री की अपील और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को सहेजने के संकल्प के साथ, अब हर वर्ष 1 मई को पूरे प्रदेश में श्रमिक दिवस को बोरे-बासी खाकर मनाने की एक नई परंपरा स्थापित हो चुकी है। इसी कड़ी में ग्राम पोलमी में भी यह आयोजन किया गया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य न केवल श्रम का सम्मान करना था, बल्कि अपनी जड़ों और पारंपरिक खान-पान को नई पीढ़ी से रूबरू कराना भी था। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने अपनी थाली में बोरे-बासी, आम की चटनी और ताजी मुनगा भाजी सजाकर छत्तीसगढ़ी अस्मिता का परिचय दिया।
दिग्गज जनप्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस खास अवसर पर जनपद सदस्य प्रतिनिधि (क्षेत्र क्रमांक 3) श्री शिव कुमार धुर्वे विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने आयोजन को संबोधित करते हुए कहा कि बोरे-बासी केवल हमारा भोजन नहीं, बल्कि हमारी मेहनत और संस्कृति का प्रतीक है। श्रमिक दिवस पर इसे खाकर हम उन लाखों हाथ पसीने बहाने वाले श्रमिकों के प्रति अपना सम्मान प्रकट करते हैं।
कार्यक्रम में सेक्टर प्रभारी श्री अंगद राम शिव जी ने भी शिरकत की और ग्रामीणों के साथ पंगत में बैठकर भोजन किया। उनके साथ वार्ड नंबर 01 के पंच श्री कालीचरण शिव जी और वार्ड नंबर 03 के पंच श्री पंचराम मरावी जी ने भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
सामूहिक सहभागिता और उल्लास
आयोजन में ग्राम के प्रबुद्ध नागरिक और सक्रिय सदस्य जैसे श्री संतोष कुमार शिव, श्री हेमन्त ब्रुम्हे, श्री अंतराम मरकाम और श्री चैतराम शिव सहित बड़ी संख्या में ग्रामवासी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में इस बात पर जोर दिया कि आधुनिकता के दौर में भी अपनी संस्कृति और खान-पान को बचाए रखना अनिवार्य है।
ग्रामीणों ने बताया कि बोरे-बासी का सेवन न केवल स्वास्थ्य के लिए लाभदायक है, बल्कि यह भीषण गर्मी में शरीर को शीतलता भी प्रदान करता है। कार्यक्रम के अंत में सभी ने श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा और ग्राम विकास का संकल्प लिया।
निष्कर्ष
पोलमी में आयोजित इस ‘बोरे-बासी तिहार’ ने यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की जनता अपनी जड़ों से गहराई से जुड़ी हुई है। श्रमिक दिवस पर आयोजित इस सादगीपूर्ण लेकिन प्रभावशाली कार्यक्रम की चर्चा पूरे क्षेत्र में हो रही है। यह आयोजन न केवल श्रमिकों के प्रति सम्मान का भाव जगाता है, बल्कि सामाजिक समरसता को भी सुदृढ़ करता है।

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