उजागर! ₹4.23 लाख की वसूली प्रस्तावित, फिर भी शिकायतकर्ता असंतुष्ट
सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल, जांच प्रतिवेदन के बाद भी नहीं थमा विवाद; ग्रामीणों ने उठाई पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग
कवर्धा। जनपद पंचायत पंडरिया अंतर्गत ग्राम पंचायत उदका में 15वें वित्त आयोग की राशि के उपयोग को लेकर उठा विवाद अब गंभीर सवालों के घेरे में है। पंचायत की राशि में कथित गड़बड़ी को लेकर उपसरपंच महेंद्र साहू, पंचगण एवं ग्रामीणों द्वारा शिकायत किए जाने के बाद जांच समिति ने जांच की। जांच के संबंध में 21 सितंबर 2026 को जारी पत्र में सरपंच ललिता मरकाम एवं पंचायत सचिव सीमा मार्को से 4 लाख 23 हजार रुपये की वसूली योग्य राशि के संबंध में नियमानुसार कार्रवाई का उल्लेख किया गया है।
जांच प्रतिवेदन में वसूली योग्य राशि का उल्लेख सामने आने के बाद पंचायत के वित्तीय प्रबंधन और विकास कार्यों में पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। आखिर पंचायत को विकास कार्यों के लिए मिलने वाली राशि का उपयोग किस प्रकार किया गया? जिन कार्यों के नाम पर भुगतान दर्शाया गया, उनकी वास्तविक स्थिति क्या है? यदि जांच में अनियमितता पाई गई है, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों का स्पष्ट जवाब अब ग्रामीण प्रशासन से मांग रहे हैं।
जांच में लाखों की राशि पर सवाल, जवाबदेही तय करने की मांग
जांच प्रतिवेदन में जिन मदों का उल्लेख किया गया है, उनमें जिरास डस्ट पर 77 हजार रुपये, सड़क मरम्मत पर 1 लाख 87 हजार रुपये, परस के घर के पास मोटरपंप स्थापना पर 49 हजार रुपये तथा जनपद स्तर से स्वीकृत दो मोटरपंपों की स्थापना पर 1 लाख 10 हजार रुपये शामिल हैं। इन मदों से संबंधित कुल राशि 4 लाख 23 हजार रुपये बताई गई है, जिसके संबंध में वसूली योग्य राशि पर कार्रवाई का उल्लेख पत्र में किया गया है।
यह मामला केवल राशि की वसूली तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पंचायत की राशि जनता के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए होती है। ऐसे में यदि जांच में वित्तीय अनियमितता सामने आई है, तो संबंधित कार्यों की गुणवत्ता, भुगतान के दस्तावेज, वास्तविक निर्माण स्थिति और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी पूरी पड़ताल होनी चाहिए।
शिकायतकर्ताओं की असंतुष्टि ने जांच प्रक्रिया पर खड़े किए सवाल
शिकायतकर्ता उपसरपंच महेंद्र साहू, पंचगण एवं ग्रामीणजन जांच से संतुष्ट नहीं हैं। उनका असंतोष इस मामले को और गंभीर बनाता है। जब शिकायत के बाद जांच कराई गई और लाखों रुपये की वसूली योग्य राशि का उल्लेख सामने आया, तब भी शिकायतकर्ताओं का संतुष्ट न होना यह मांग उठाता है कि जांच के सभी पहलुओं को स्पष्ट किया जाए।
ग्रामीणों की मांग है कि जांच में किन बिंदुओं की पड़ताल की गई, किन अभिलेखों के आधार पर राशि निर्धारित की गई और क्या सभी संबंधित कार्यों की वास्तविक स्थिति का समुचित परीक्षण हुआ—इन सवालों का जवाब सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, यदि जांच में कोई पहलू छूट गया है, तो उसकी भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
सिर्फ वसूली का उल्लेख काफी नहीं, कार्रवाई का परिणाम भी सामने आए
ग्राम पंचायतों में विकास के नाम पर खर्च होने वाली सरकारी राशि का हिसाब पारदर्शी होना चाहिए। यदि किसी पंचायत में वित्तीय अनियमितता पाई जाती है, तो केवल वसूली योग्य राशि का उल्लेख कर देना पर्याप्त नहीं है। प्रशासन को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि राशि की वसूली के लिए क्या कार्रवाई हुई, संबंधित कार्यों की वास्तविक स्थिति क्या है और नियमानुसार आगे कौन-से कदम उठाए गए हैं।
अब निगाहें जनपद पंचायत पंडरिया के अधिकारियों पर टिकी हैं। क्या प्रशासन शिकायतकर्ताओं की असंतुष्टि को गंभीरता से लेते हुए पूरे मामले की पुनः निष्पक्ष समीक्षा करेगा? क्या वसूली की कार्रवाई की वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाएगी? या फिर यह मामला जांच प्रतिवेदन और कागजी कार्रवाई तक ही सीमित रह जाएगा?
उदका पंचायत का यह मामला अब प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही की कसौटी बन गया है। ग्रामीणों की मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच हो, सरकारी राशि के उपयोग का पूरा हिसाब सामने आए और जो भी जिम्मेदार पाया जाए, उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।