ढोलढोली पुल पर बाढ़ का खतरा: लापरवाही से पुल पार करने उतरा वाहन, बड़ा हादसा टला; घंटों बाधित रहा आवागमन

lok sev
previous arrow
next arrow
ढोलढोली पुल पर बाढ़ का खतरा: लापरवाही से पुल पार करने उतरा वाहन, बड़ा हादसा टला; घंटों बाधित रहा आवागमन
पंडरिया। पंडरिया विकासखंड के वनांचल क्षेत्र में गुरुवार दोपहर हुई तेज बारिश के बाद आगर नदी उफान पर आ गई। नदी का जलस्तर बढ़ने से भाकुर मार्ग स्थित ढोलढोली पुल पूरी तरह जलमग्न हो गया और पुल के ऊपर से तेज बहाव के साथ पानी बहने लगा। इसके चलते करीब तीन घंटे तक दोनों ओर सैकड़ों ग्रामीण और यात्री फंसे रहे। प्रशासन द्वारा आवागमन रोकने की सलाह के बावजूद एक वाहन चालक ने लापरवाही दिखाते हुए पुल पार करने का प्रयास किया, जिससे बड़ा हादसा होते-होते टल गया।
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पुल के ऊपर तेज बहाव के बीच वाहन चालक ने जोखिम उठाते हुए वाहन को आगे बढ़ा दिया। इसी दौरान वाहन का एक पहिया पुल से नीचे उतर गया, जिससे वाहन असंतुलित हो गया। मौके पर मौजूद ग्रामीणों और यात्रियों ने तत्काल मदद करते हुए वाहन में सवार लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला। राहत की बात रही कि इस घटना में कोई जनहानि नहीं हुई, लेकिन चालक की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता था।
ग्रामीणों का कहना है कि जब पुल के ऊपर तेज बहाव में पानी बह रहा हो, तब किसी भी वाहन या व्यक्ति को नदी पार करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। हर वर्ष बरसात के दौरान इस पुल पर ऐसी ही स्थिति बनती है, लेकिन इसके बावजूद लोग जान जोखिम में डालकर पुल पार करने का प्रयास करते हैं।
स्थानीय लोगों ने बताया कि ढोलढोली पुल के नीचे लगाए गए पाइपों में पत्थर, मिट्टी और अन्य मलबा भर जाने के कारण नदी का पानी सुचारु रूप से नहीं निकल पाता। यही वजह है कि थोड़ी अधिक बारिश होने पर पानी पुल के ऊपर से बहने लगता है और आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार प्रशासन को इस समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक पुल के नीचे जमा मलबा साफ नहीं कराया गया है।
ग्रामीणों ने बताया कि इस स्थान पर पूर्व में कई हादसे हो चुके हैं और कई लोग अपनी जान भी गंवा चुके हैं। इसके बावजूद स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों का कहना है कि पुल के नीचे लगे पाइपों की नियमित सफाई कराई जाए तो काफी हद तक समस्या का समाधान हो सकता है। साथ ही इस स्थान पर एक ऊंचे और मजबूत पुल का निर्माण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।
बरसात के मौसम में ढोलढोली पुल पर पानी आने से भाकुर, देवानपटपर, सेंदुरखार, आगरपानी, छिंदीडीह, टेलियापानी सहित अनेक वनांचल गांवों का संपर्क मुख्य मार्ग से कट जाता है। इसका सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूली शिक्षा, दैनिक आवागमन और आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पर पड़ता है। आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि ढोलढोली पुल की समस्या का स्थायी समाधान करते हुए जल्द से जल्द बड़े पुल का निर्माण कराया जाए तथा पुल के नीचे जमा मलबे की तत्काल सफाई कराई जाए, ताकि हर वर्ष बरसात में लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करने की मजबूरी न रहे।

Related posts