शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा के समावेश पर जोर, टैगोर पुण्यतिथि पर हुआ बौद्धिक विमर्श
रायपुर, 8 अगस्त 2026। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय, रायपुर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर की पुण्यतिथि के अवसर पर 7 अगस्त को “आधुनिक शिक्षा में भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व” विषय पर बौद्धिक विमर्श आयोजित किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने आधुनिक शिक्षा व्यवस्था में भारतीय ज्ञान, दर्शन, संस्कृति और जीवन मूल्यों को शामिल करने की आवश्यकता पर जोर दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) मनोज दयाल ने की। उन्होंने कहा कि ‘जन-गण-मन’ केवल राष्ट्रगान नहीं, बल्कि भारत की ज्ञान परंपरा, दर्शन और अध्यात्म का संक्षिप्त स्वरूप है। गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर ने इसमें पश्चिमी राष्ट्रवाद की संकीर्णता के स्थान पर भारत की सर्वसमावेशी आत्मा को स्थान दिया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगान में देश के प्रति सम्मान के साथ उपनिषद की ‘सह नाववतु, सह नौ भुनक्तु’ की भावना भी दिखाई देती है, जिसका भाव है कि हम साथ चलें और साथ आगे बढ़ें।
विमर्श के दौरान डॉ. कपिल देव प्रजापति ने कहा कि प्राचीन भारतीय शिक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल पुस्तकीय ज्ञान देना नहीं था, बल्कि चरित्र निर्माण, व्यक्तित्व विकास, समाज सेवा और प्रकृति के प्रति सम्मान जैसे मूल्यों का विकास करना भी था। उन्होंने कहा कि वर्तमान शिक्षा व्यवस्था में इन मूलभूत मूल्यों को उचित स्थान दिया जाना चाहिए।
प्रो. शैलेंद्र खंडेलवाल ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा स्थिर नहीं रही, बल्कि परिस्थितियों और आवश्यकताओं के अनुरूप निरंतर विकसित होती रही है। उन्होंने कहा कि प्राचीन भारतीय ज्ञान को सही संदर्भ में समझने के लिए उसके मूल स्रोतों और विचार परंपराओं का गहराई से अध्ययन जरूरी है।
डॉ. राजेंद्र मोहंती ने कहा कि शिक्षा को केवल भारतीय ज्ञान तक सीमित रखने के बजाय विश्वभर में उपलब्ध श्रेष्ठ ज्ञान और विचारों को भी शिक्षा नीति का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उन्होंने भारतीय और वैश्विक ज्ञान परंपराओं के समन्वय को आधुनिक शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण बताया।
डॉ. आशुतोष मंडावी ने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा के कई महत्वपूर्ण हिस्से समय के साथ विलुप्त या उपेक्षित हो गए हैं। ऐसे ज्ञान को खोजने, संरक्षित करने और आधुनिक संदर्भों के अनुरूप पुनः विकसित करने की दिशा में गंभीर प्रयास किए जाने की जरूरत है।
कार्यक्रम का संचालन पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष श्री पंकज नयन पांडेय ने किया। इस अवसर पर कुलसचिव सुनील शर्मा, विभागाध्यक्ष डॉ. नृपेन्द्र शर्मा सहित विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अतिथि प्राध्यापक उपस्थित रहे। विमर्श में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने, प्राचीन ज्ञान के संरक्षण तथा विद्यार्थियों के समग्र व्यक्तित्व विकास को शिक्षा का महत्वपूर्ण उद्देश्य बनाने पर विचार रखे गए।