कुई-कुकदुर में आरएसएस पंडरिया खंड का होली मिलन समारोह संपन्न

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कुई-कुकदुर में आरएसएस पंडरिया खंड का होली मिलन समारोह संपन्न
पंडरिया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पंडरिया खंड द्वारा होली मिलन समारोह का आयोजन वनांचल की गोद में बसे ग्राम कुई-कुकदुर स्थित मां चंडी मंदिर प्रांगण में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। रंग पंचमी के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में पंडरिया खंड के विभिन्न मंडलों से बड़ी संख्या में स्वयंसेवक, ग्रामीण और बच्चे शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन अपराह्न 2 बजे से किया गया, जहां उपस्थित स्वयंसेवकों ने फाग गीतों का गायन-वादन करते हुए एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।

कार्यक्रम में मुख्य रूप से प्रांत किसान कार्य प्रमुख श्री उत्तर यादव, खंड कार्यवाह श्री होरीलाल गबेल, सह गौसेवा आयोग अध्यक्ष श्री बिशेषर पटेल, जिला सेवा प्रमुख श्री रघुनन्दन गुप्ता, श्री रामनाथ राजपूत, श्री नरेंद्र चंद्रवंशी, श्री चन्द्रकिशोर प्रजापति, श्री कमलेश जायसवाल, श्री रामखेलावन साहू, श्री श्यामनरेश वैष्णव, प्रदीप कैवर्त, सीताराम यादव, धर्मराज वर्मा, कृष्णा कुम्भकार, साधुराम कोठारी, लक्ष्मी ठाकुर, विश्वनाथ, विक्रम परस्ते, बिसेन परस्ते, मोहित, विक्रम ठाकुर, पुरुषोत्तम निर्मलकर, ठाकुर देव चंद्रवंशी, द्वारिका विश्वकर्मा, महेश धुर्वे, सहदेव साहू, मनोज बांधेकर, गिरिज साहू, ओमशंकर श्रीवास, सुशील चंद्रवंशी, गोविंद चंद्रवंशी, बलराम चंद्रवंशी, राजाराम कुंभकार, मनहरन श्रीवास, कबारीराम धुर्वे, रामदयाल सहित अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

इस अवसर पर उपस्थित स्वयंसेवकों को संबोधित करते हुए प्रांत किसान कार्य प्रमुख श्री उत्तर यादव ने कहा कि भारतीय सनातन संस्कृति में तीज-त्योहारों का विशेष महत्व है। दीपावली, हरेली, तीजा-पोरा और होली जैसे पर्व समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करने का कार्य करते हैं। इन त्योहारों के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्ग, मत-पंथ और जातियों के लोग एक साथ मिलकर उत्सव मनाते हैं।
उन्होंने कहा कि होली ऐसा पर्व है जिसमें ऊंच-नीच और भेदभाव को भुलाकर लोग एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाकर गले मिलते हैं। यही हमारी संस्कृति की विशेषता है, जो हजारों वर्षों से समाज को जोड़कर रखे हुए है। उन्होंने बताया कि विश्व में कई प्राचीन सभ्यताएं समाप्त हो चुकी हैं, लेकिन भारत की सनातन संस्कृति आज भी जीवित और सशक्त है। इसी सांस्कृतिक विरासत के कारण आज भारत पुनः विश्व गुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
कार्यक्रम के अंत में सभी स्वयंसेवकों और ग्रामीणों ने आपसी भाईचारे और सामाजिक एकता का संदेश देते हुए होली पर्व की शुभकामनाएं दीं। गांव के लोगों ने भी इस आयोजन में उत्साहपूर्वक भाग लेकर कार्यक्रम को सफल बनाया।

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