साकत पनिका समाज ने पेश की मानवता की मिसाल, दिवंगत कोटवार के परिवार को दी ₹1.94 लाख की आर्थिक मदद और सामग्री

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साकत पनिका समाज ने पेश की मानवता की मिसाल, दिवंगत कोटवार के परिवार को दी ₹1.94 लाख की आर्थिक मदद और सामग्री
पंडरिया/कबीरधाम: छत्तीसगढ़ साकत पनिका समाज ने एक बार फिर मानवता और सामाजिक उत्तरदायित्व का धर्म निभाते हुए एकजुटता की अनूठी मिसाल पेश की है। ग्राम दल्ली (तहसील पंडरिया, जिला कबीरधाम) निवासी स्वर्गीय श्री धनीराम पड़वार (कोटवार) जी के दशगात्र कार्यक्रम के दौरान समाज के लोगों ने संकट की इस घड़ी में पीड़ित परिवार का खुलकर साथ दिया। 43 वर्ष की आयु में दिवंगत हुए श्री धनीराम पड़वार जी को समाज ने भावभीनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।दुख की घड़ी में मिला बड़ा सहयोगदशगात्र कार्यक्रम में उपस्थित सगा समाज के सामूहिक सहयोग से दुखिया परिवार को ₹1,94,000/- (एक लाख चौरानवे हजार रुपये) की नकद आर्थिक सहायता प्रदान की गई। इसके साथ ही सामाजिक बंधुओं द्वारा 600 किलोग्राम चावल और 67 नग गमछा भी परिवार को सौंपा गया। समाज के प्रबुद्ध जनों का कहना है कि यह सहयोग केवल आर्थिक सहायता नहीं है, बल्कि समाज की आत्मीयता, अपनत्व और सामाजिक संस्कारों का जीवंत प्रमाण है।प्रांतीय सचिव ने बढ़ाया हौसलाइस अवसर पर छत्तीसगढ़ साकत पनिका समाज के प्रांतीय सचिव श्री थानू राम बघेल ने स्वर्गीय धनीराम पड़वार जी को श्रद्धांजलि देते हुए अपने संबोधन में कहा, “जब समाज का प्रत्येक व्यक्ति दुख की घड़ी में एक-दूसरे के साथ खड़ा होता है, तब पीड़ित परिवार का दुख कुछ हद तक कम हो जाता है। समाज की यही एकता, सहयोग और संवेदनशीलता हमारी सबसे बड़ी शक्ति है।” उन्होंने आगे कहा कि यदि समाज इसी प्रकार तन, मन और धन से परस्पर सहयोग करता रहे, तो कोई भी परिवार स्वयं को अकेला महसूस नहीं करेगा, क्योंकि संगठित समाज ही सशक्त समाज का निर्माण करता है।सफलतापूर्वक संपन्न हुआ कार्यक्रमक्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के अथक सहयोग और सूझबूझ से दशगात्र कार्यक्रम का कुशल व अनुशासित संचालन संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उपस्थित सभी सामाजिक बंधुओं, माताओं, बहनों, युवाओं, वरिष्ठजनों और क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं के प्रति पीड़ित परिवार ने हृदय से कृतज्ञता व्यक्त की और उनकी आत्मीय उपस्थिति के लिए आभार प्रकट किया। अंत में सभी ने समाज की हर सुख-दुख की घड़ी में एक-दूसरे का साथ निभाने और साकत पनिका समाज की एकता, सेवा एवं संस्कारों की इस गौरवशाली परंपरा को आगे भी मजबूत बनाए रखने का संकल्प लिया।

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