17 अगस्त को लोरमी में विश्व आदिवासी दिवस का भव्य कार्यक्रम, कृष्णा पुसम समेत प्रदेशभर के आदिवासी कांग्रेस पदाधिकारी होंगे शामिल

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17 अगस्त को लोरमी में विश्व आदिवासी दिवस कार्यक्रम, प्रदेशभर के आदिवासी कांग्रेस पदाधिकारी होंगे शामिल
लोरमी। विश्व आदिवासी दिवस के उपलक्ष्य में 17 अगस्त को लोरमी के मानस मंच में भव्य रैली एवं कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ प्रदेश आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश पदाधिकारी, जिला अध्यक्ष, समाज प्रमुख और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता शामिल होंगे। कार्यक्रम सुबह 10 बजे से आयोजित किया जाएगा।
कार्यक्रम में आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश सचिव एवं मुंगेली जिला प्रभारी कृष्णा पुसम अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रदेश पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों से अधिक से अधिक साथियों के साथ लोरमी पहुंचने की अपील की गई है।
आयोजक प्रदेश उपाध्यक्ष आदिवासी कांग्रेस रामजी ध्रुव हैं, जबकि संगठन महासचिव कुलदीप ध्रुव ने भी कार्यक्रम में अधिक से अधिक लोगों की भागीदारी की अपील की है। आयोजकों ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, अधिकार, संस्कृति और सम्मान से जुड़े विषयों पर जागरूकता का अवसर है।
अधिकार और पहचान का संदेश देगा कार्यक्रम
विश्व आदिवासी दिवस हर वर्ष 9 अगस्त को संयुक्त राष्ट्र द्वारा International Day of the World’s Indigenous Peoples के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य दुनिया के मूलनिवासी समुदायों के अधिकारों, पहचान, संस्कृति, भाषा, भूमि, प्राकृतिक संसाधनों और निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।
संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 23 दिसंबर 1994 को प्रस्ताव 49/214 के माध्यम से 9 अगस्त को इस दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया था। 9 अगस्त 1982 को संयुक्त राष्ट्र के Working Group on Indigenous Populations की पहली बैठक हुई थी, इसलिए इस तारीख का विशेष ऐतिहासिक महत्व है।
कृष्णा पुसम ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस को केवल नृत्य, वेशभूषा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं किया जाना चाहिए। यह दिन आदिवासी समाज के अधिकारों, आत्मनिर्णय, जल-जंगल-जमीन, भाषा, संस्कृति और विकास में प्रभावी भागीदारी के लिए संकल्प लेने का दिन है।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज से जुड़े मामलों में निर्णय लेते समय उनकी सार्थक भागीदारी जरूरी है। भूमि, जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े विषयों में प्रभावित समुदाय की आवाज को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की भाषा, परंपरा और पारंपरिक ज्ञान केवल संस्कृति का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों की पहचान हैं। इसलिए इनके संरक्षण के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक विकास के अवसरों को भी मजबूत करना जरूरी है।
कृष्णा पुसम ने कहा कि 17 अगस्त का लोरमी कार्यक्रम आदिवासी समाज की एकजुटता, अधिकारों और सम्मान का संदेश देगा। उन्होंने प्रदेश पदाधिकारियों, जिला अध्यक्षों और समाज प्रमुखों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की।
जय जोहार। जय आदिवासी।

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