कबीरधाम में मिला इतिहास का अनमोल खजाना, 375 वर्ष पुरानी तालपत्र पांडुलिपि सहित 38 दुर्लभ दस्तावेज चिन्हित
कवर्धा, 12 जून। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा संचालित “ज्ञान भारतम् राष्ट्रीय पांडुलिपि सर्वेक्षण” अभियान के तहत कबीरधाम जिले में इतिहास, संस्कृति और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़ी 38 दुर्लभ एवं महत्वपूर्ण पांडुलिपियों तथा ऐतिहासिक दस्तावेजों की पहचान की गई है। कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा के मार्गदर्शन में संचालित इस सर्वेक्षण ने जिले की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है।

सर्वेक्षण में सबसे महत्वपूर्ण खोज लगभग 375 वर्ष पुरानी तालपत्र पर लिखित बंगाली भाषा की पाक कला संबंधी पांडुलिपि है। यह दस्तावेज उस समय की खानपान संस्कृति, जीवन शैली और पारंपरिक ज्ञान का महत्वपूर्ण प्रमाण माना जा रहा है। इसके अलावा संस्कृत भाषा में लिखित सन 1856 की श्रीमद्भगवद्गीता एवं गजेंद्र मोक्ष संबंधी पांडुलिपि तथा सन 1839 की गीत गोविंद पांडुलिपि भी प्राप्त हुई है, जो भारतीय भक्ति साहित्य और सांस्कृतिक विरासत की अमूल्य धरोहर हैं।
इतिहासकारों के लिए विशेष महत्व रखने वाले भोरमदेव शिलालेख का सन 1867 का अनुवाद, रामनगर (मंडला) शिलालेख का हिंदी अनुवाद तथा मड़वा महल शिलालेख का 1898 ईस्वी का पद्यात्मक अनुवाद भी सर्वेक्षण में मिला है। साथ ही ब्रह्मांड के चित्रांकन से जुड़े संस्कृत दस्तावेज और जैमिनी परंपरा की पोथियां भी प्राप्त हुई हैं, जो भारतीय दर्शन, ज्योतिष और वैदिक चिंतन की समृद्ध परंपरा को दर्शाती हैं।

ग्राम बसनी निवासी सुभाष पाण्डेय के निजी संग्रह से धर्म, दर्शन और वैदिक परंपराओं से संबंधित कई दुर्लभ पांडुलिपियां प्राप्त हुई हैं। इनमें महामृत्युंजय स्त्रोत, गुरूगीता, संध्या विधि, श्राद्ध पद्धति, तांत्रिक संध्या, वनोत्सर्गादि विधि सहित अनेक महत्वपूर्ण ग्रंथ शामिल हैं। इन दस्तावेजों में धार्मिक अनुष्ठानों, आध्यात्मिक साधना और लोक परंपराओं से जुड़ी बहुमूल्य जानकारी संरक्षित है।
प्रशासन के अनुसार इन सभी दुर्लभ पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण, दस्तावेजीकरण और वैज्ञानिक संरक्षण किया जाएगा, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए इन्हें सुरक्षित रखा जा सके। ज्ञान भारतम् अभियान का उद्देश्य देशभर में बिखरी प्राचीन पांडुलिपियों को खोजकर उनका संरक्षण करना है।




