बेलहरी बांध में 2.68 करोड़ की मरम्मत पर सवाल, पहली बारिश में ही पार से रिसने लगा पानी

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करोड़ों की मरम्मत, पहली बारिश में ही बांध की पार छलनी! बेलहरी बांध ने खोली निर्माण की पोल, ग्रामीणों में दहशत
कवर्धा -: करोड़ों रुपये खर्च करने के बावजूद बेलहरी बांध की हालत ने जिम्मेदार विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सहसपुर लोहारा विकासखंड के ग्राम बेलहरी स्थित करीब 50 साल पुराने बांध की पार से बारिश के शुरुआती दौर में ही पानी का रिसाव शुरू हो गया है। कुछ महीने पहले ही करीब 2 करोड़ 68 लाख रुपये की लागत से बांध की मरम्मत कराई गई थी। इसके बावजूद पहली बारिश में पार से पानी रिसने लगा, जिससे मरम्मत कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी निगरानी पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
करोड़ों खर्च के बाद भी रिसाव, आखिर किस बात की हुई मरम्मत?
ग्रामीणों के मुताबिक मार्च-अप्रैल में बांध की मरम्मत का काम कराया गया था। दावा किया गया कि बांध को मजबूत बनाने के लिए भारी भरकम राशि खर्च की गई, लेकिन बारिश ने कुछ ही महीनों में काम की हकीकत सामने ला दी।
ग्रामीणों का आरोप है कि बांध के सूखने के बाद मरम्मत के दौरान अंदरूनी हिस्से में पर्याप्त मिट्टी नहीं डाली गई। बांध के अंदर से निकले मुरूम के ही इस्तेमाल की बात भी ग्रामीणों द्वारा कही जा रही है। उनका आरोप है कि बांध की मजबूती पर ध्यान देने के बजाय बाहरी सतह पर सामग्री डालकर मरम्मत का काम निपटा दिया गया।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन मरम्मत के कुछ ही महीनों बाद रिसाव सामने आना निश्चित रूप से जांच का विषय है।
8 से 10 गांवों की सिंचाई, बढ़ते जलस्तर ने बढ़ाई चिंता
बेलहरी बांध से आसपास के करीब 8 से 10 गांवों के किसानों को सिंचाई सुविधा मिलती है। ऐसे में बांध की पार से लगातार रिसाव केवल फसल और सिंचाई व्यवस्था का मामला नहीं है, बल्कि बांध की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
जैसे-जैसे जलस्तर बढ़ेगा, बांध की पार पर पानी का दबाव भी बढ़ेगा। ऐसे में यदि रिसाव बढ़ता है तो स्थिति चिंताजनक हो सकती है। ग्रामीणों के बीच भी इसे लेकर डर का माहौल है।
रिसाव रोकने की जगह अब जेसीबी से ढलान बनाने की कवायद
रिसाव वाले हिस्से की स्थिति सामने आने के बाद बांध के उलट हिस्से में जेसीबी लगाकर उभरी सतह को समतल करने और ढलान बनाने का काम किया जा रहा है। बताया जा रहा है कि करीब 17 फीट जलस्तर पहुंचने के बाद बांध उलट होने की स्थिति में आता है।
सवाल यह है कि यदि बांध की मरम्मत कुछ महीने पहले ही पूरी हुई थी, तो अब बारिश के बीच आनन-फानन में जेसीबी क्यों चलानी पड़ रही है? क्या मरम्मत के समय बांध की संरचना और जल दबाव का पर्याप्त तकनीकी आकलन किया गया था?
2.68 करोड़ के काम का चाहिए हिसाब
सबसे बड़ा सवाल यही है कि 2 करोड़ 68 लाख रुपये की स्वीकृत राशि से आखिर ऐसा कौन-सा काम हुआ, जो पहली बारिश का दबाव भी नहीं झेल पा रहा?
क्या मरम्मत में निर्धारित तकनीकी मापदंडों का पालन हुआ?
क्या निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच हुई?
क्या कार्य पूरा होने के बाद विभाग ने बांध की मजबूती का तकनीकी परीक्षण कराया?
क्या जिम्मेदार अधिकारियों ने मौके पर जाकर काम की गुणवत्ता का निरीक्षण किया था?
और यदि निरीक्षण हुआ था, तो फिर कुछ ही महीनों में बांध की पार से पानी का रिसाव कैसे शुरू हो गया?
ग्रामीणों ने मांगी निष्पक्ष तकनीकी जांच
ग्रामीणों ने बेलहरी बांध की मरम्मत में इस्तेमाल की गई सामग्री, कार्य की गुणवत्ता और तकनीकी मापदंडों की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी यदि बांध की पार से पानी रिस रहा है, तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी है।
अब निगाहें संबंधित विभाग पर हैं। सवाल सिर्फ रिसाव का नहीं, बल्कि जनता के पैसों से हुए 2.68 करोड़ रुपये के काम की गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने का है।
बारिश ने फिलहाल बांध की पार में रिसाव दिखाया है, लेकिन इसके साथ ही मरम्मत के दावों की भी असली परीक्षा शुरू हो गई है। अब देखना होगा कि विभाग इस रिसाव को महज तकनीकी समस्या बताकर टालता है या करोड़ों रुपये के मरम्मत कार्य की वास्तविकता सामने लाने के लिए निष्पक्ष जांच कराता है।

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