पुराने वायर से बना दिए 5 लर्निंग टूल्स, पण्डरिया के शिक्षक शिवकुमार बंजारे का नवाचार राज्य स्तर पर छाया

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चर्चा पत्र में छाया शिवकुमार बंजारे का शैक्षणिक नवाचार
शून्य निवेश से निर्मित 5 बहुउपयोगी टूल्स से बच्चे खेल-खेल में सीख रहे भाषा और गणित
पण्डरिया- स्कूल शिक्षा विभाग एवं समग्र शिक्षा छत्तीसगढ़ द्वारा राज्य के चुनिंदा नवाचारी एवं समर्पित शिक्षकों के उत्कृष्ट कार्यों और शैक्षणिक नवाचारों को साझा करने के उद्देश्य से प्रकाशित चर्चा पत्र में कबीरधाम जिले के पण्डरिया विकासखंड अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला केशलीगोड़ान के प्रधान पाठक शिवकुमार बंजारे के अभिनव शैक्षणिक प्रयास को स्थान मिला है। जो कि राज्य के सभी शिक्षकों तक प्रसारित होता है। उनके द्वारा FLN (मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता) के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए शून्य निवेश पर निर्मित पांच बहुउपयोगी लर्निंग-टीचिंग टूल्स को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पुराने वायर के टुकड़ों से तैयार इन टूल्स के माध्यम से बच्चे हिन्दी में अ से श्र तक वर्ण निर्माण एवं पठन, मात्रा और शब्द निर्माण, गणित में 1 से 100 तक संख्या निर्माण, संख्या बोध, पैटर्न, आकृतियां, ज्यामिति, मापन एवं सरल गणितीय अवधारणाओं तथा अंग्रेजी में A से Z तक अक्षरों की पहचान, लेखन एवं शब्द निर्माण जैसी गतिविधियां स्वयं करते हुए सीखते हैं।
इन टूल्स की विशेषता यह है कि बच्चे इन्हें चक्रीय क्रम में घुमाते हुए राइटिंग स्ट्रोक के रूप में प्रयोग करते हैं। इसके माध्यम से बढ़ते-घटते क्रम, छोटा-बड़ा, कम-ज्यादा, हल्का-भारी, दूर-पास, विभिन्न पैटर्न, गणितीय संकेतों एवं ज्यामितीय आकृतियों सहित अनेक अवधारणाओं को मूर्त रूप में समझाया जाता है। इससे सीखना बच्चों के लिए सहज, रोचक और आनंददायक बन जाता है।
विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए उपयोगी
शिवकुमार बंजारे ने इन टूल्स का निर्माण विशेष रूप से उन बच्चों को ध्यान में रखकर किया है, जिन्हें वर्ण एवं अंकों की पहचान, पढ़ने-लिखने तथा भाषा और गणित की बुनियादी अवधारणाओं को समझने में कठिनाई होती है। गतिविधि आधारित इस नवाचार के माध्यम से ऐसे बच्चों को सीखने के समान अवसर प्रदान कर शिक्षा की मुख्यधारा से जोड़ने में सहायता मिलती है।
भाषा, गणित और मोटर स्किल का समन्वित विकास
इन पांच टूल्स के प्रयोग से बच्चों में वर्ण पहचान, ध्वनि पहचान, डिकोडिंग, ब्लेंडिंग, पठन, लेखन, समझ एवं संचार कौशल विकसित होते हैं। वहीं गणित में संख्या बोध, गणना, संख्या प्रणाली, समस्या समाधान, डेटा संग्रह, मापन, मात्रा, ज्यामिति और पैटर्न की समझ विकसित होती है। अंग्रेजी में स्माल-कैपिटल लेटर की पहचान, अक्षर-ध्वनि संबंध तथा सरल शब्द निर्माण का अभ्यास कराया जाता है। साथ ही हाथों से गतिविधि करने के कारण बच्चों की मोटर स्किल और रचनात्मक क्षमता को भी बढ़ावा मिलता है।
शिक्षक मार्गदर्शक, बच्चा स्वयं सीखने वाला
इस नवाचार की सबसे बड़ी विशेषता ‘करके सीखना’ और ‘स्वयं सीखना’ है। गतिविधियों के दौरान शिक्षक केवल मार्गदर्शक की भूमिका निभाता है, जबकि बच्चे स्वयं टूल्स का उपयोग कर वर्ण, अंक, शब्द, प्रतीक, पैटर्न एवं आकृतियों का निर्माण और पठन करते हैं। इससे बच्चों में आत्मविश्वास, जिज्ञासा, रचनात्मकता और सीखने की रुचि बढ़ती है।
प्रधान पाठक शिवकुमार बंजारे का यह नवाचार कम लागत, स्थानीय संसाधन, सरल प्रयोग और अधिक शैक्षणिक उपयोगिता का प्रभावी उदाहरण है। इसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एवं FLN के लक्ष्यों की दिशा में ग्रामीण एवं संसाधन-विहीन विद्यालयों के लिए एक उपयोगी और अनुकरणीय पहल माना जा सकता है। चर्चा पत्र में स्थान मिलना उनके नवाचार की उपयोगिता एवं प्रभावशीलता को रेखांकित करता है।

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