विकास कार्यों के नाम पर लापरवाही का खेल! ग्राम पंचायत अंतरियाखुर्द में पारदर्शिता तार-तार
निर्माणाधीन पंचायत भवन में नागरिक सूचना पटल गायब, तालाब सौंदर्यीकरण में जंगल कट पत्थरों का इस्तेमाल; सरपंच-सचिव की कार्यप्रणाली पर उठे तीखे सवाल, हादसे का इंतजार कर रहे जिम्मेदार
कवर्धा । ग्राम पंचायत अंतरियाखुर्द में विकास कार्यों के नाम पर चल रही निर्माण गतिविधियां अब ग्रामीणों के बीच गंभीर असंतोष का कारण बनती जा रही हैं। पंचायत भवन निर्माण से लेकर तालाब सौंदर्यीकरण तक पारदर्शिता और निर्माण गुणवत्ता को लेकर ऐसे सवाल खड़े हो रहे हैं, जिनका जवाब ग्राम पंचायत के जिम्मेदारों को देना चाहिए। शासन की राशि से होने वाले विकास कार्यों में यदि नागरिकों को ही जानकारी नहीं मिले और सुरक्षा के बुनियादी मानकों की अनदेखी हो, तो ऐसे विकास कार्यों की उपयोगिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
पंचायत भवन निर्माण में सूचना पटल गायब, आखिर क्या छिपाना चाहते हैं जिम्मेदार
ग्राम पंचायत अंतरियाखुर्द में निर्माणाधीन पंचायत भवन में नागरिक सूचना पटल का नजर नहीं आना पंचायत की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। आखिर निर्माण कार्य किस योजना के तहत कराया जा रहा है स्वीकृत राशि कितनी है निर्माण एजेंसी कौन है कार्य कब तक पूरा होना है इन महत्वपूर्ण जानकारियों को सार्वजनिक करने में आखिर सरपंच-सचिव को क्या परेशानी है नागरिक सूचना पटल केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि सरकारी निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसके अभाव में ग्रामीणों को निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति और खर्च की जानकारी कैसे मिलेगी
तालाब सौंदर्यीकरण या दुर्घटना को खुला निमंत्रण
तालाब सौंदर्यीकरण कार्य में जंगल कट एवं अनगढ़ पत्थरों के उपयोग को लेकर भी गंभीर सवाल सामने आ रहे हैं। सौंदर्यीकरण के नाम पर यदि ऐसे पत्थरों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो लोगों और मवेशियों के लिए खतरा बन सकते हैं, तो इसे कैसी विकास की सोच कहा जाए? तालाब के आसपास आने-जाने वाले ग्रामीणों के साथ गाय, बैल, भैंस और अन्य पशुओं के पैर पत्थरों के बीच फंसने अथवा ठोकर लगने से दुर्घटना की आशंका बनी हुई है। आखिर जिम्मेदारों ने निर्माण शुरू करने से पहले सुरक्षा और उपयोगिता का ध्यान क्यों नहीं रखा
विडंबना यह है कि तालाब सौंदर्यीकरण कार्य स्थल पर भी नागरिक सूचना पटल का अभाव बताया जा रहा है। इससे निर्माण की लागत, स्वीकृति और निर्धारित मापदंडों को लेकर ग्रामीणों के सामने सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी धन से होने वाले कार्यों में यदि सूचना ही गायब रहे, तो पारदर्शिता की बात महज कागजी दावा बनकर रह जाएगी।
सरपंच-सचिव की जवाबदेही आखिर कब तय होगी
ग्राम पंचायत के सरपंच और सचिव की जिम्मेदारी केवल निर्माण कार्य शुरू करवाकर औपचारिकता पूरी करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि कार्य निर्धारित गुणवत्ता, तकनीकी मापदंड और सुरक्षा के अनुरूप हो। लेकिन अंतरियाखुर्द में सामने आ रही स्थिति ने जिम्मेदारों की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिया है। क्या पंचायत में निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी हो रही है या फिर सरकारी राशि खर्च होने के बाद जवाबदेही से पल्ला झाड़ने की तैयारी है
अब प्रशासन की परीक्षा, जांच होगी या फिर मामला ठंडे बस्ते में जाएगा
ग्रामीणों की मांग है कि जनपद पंचायत एवं जिला पंचायत के वरिष्ठ अधिकारी तत्काल निर्माणाधीन पंचायत भवन और तालाब सौंदर्यीकरण कार्य का निष्पक्ष निरीक्षण करें। निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच कराई जाए, असुरक्षित पत्थरों को हटाकर सुरक्षित व्यवस्था बनाई जाए तथा दोनों निर्माण स्थलों पर नागरिक सूचना पटल अनिवार्य रूप से लगवाया जाए।
साथ ही निर्माण कार्यों में यदि गुणवत्ता या निर्धारित नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो संबंधित जिम्मेदारों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या ग्रामीणों को विकास कार्यों की जानकारी मांगने और सुरक्षित निर्माण की अपेक्षा रखने का भी अधिकार नहीं है आखिर प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना या अनियमितता की शिकायत का इंतजार क्यों करे? अब जरूरत केवल कागजी जांच की नहीं, बल्कि मौके पर वास्तविक कार्रवाई और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने की है।