मंडी परिसर में निर्माण के नाम पर गुणवत्ता की खुलेआम धज्जियां मिट्टीयुक्त रेत से हो रहा दुकानों का निर्माण
मंडी सचिव की रहस्यमयी चुप्पी पर उठे सवाल, कार्यपालन अभियंता से लेकर उप अभियंताओं तक की निगरानी व्यवस्था कटघरे में; सूचना पटल गायब, सरकारी धन की बंदरबांट की आशंका
कवर्धा । कबीरधाम जिले के पंडरिया विधानसभा मुख्यालय स्थित कृषि उपज मंडी परिसर में दुकानों के निर्माण कार्य में कथित अनियमितताओं ने निर्माण व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। निर्माण स्थल पर स्थानीय नदी की मिट्टीयुक्त रेत का खुलेआम उपयोग किए जाने की शिकायत सामने आ रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता के निर्धारित मापदंडों को ताक पर रखकर मनमानी की जा रही है। जनता के खून-पसीने की कमाई से स्वीकृत विकास कार्य में यदि घटिया निर्माण सामग्री का इस्तेमाल हो रहा है, तो यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी धन और जनविश्वास के साथ गंभीर खिलवाड़ है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर मंडी सचिव किस जिम्मेदारी का निर्वहन कर रहे हैं? मंडी परिसर में निर्माण कार्य उनकी नाक के नीचे संचालित हो रहा है, लेकिन निर्माण सामग्री की गुणवत्ता पर प्रभावी निगरानी दिखाई नहीं देने की शिकायत है। क्या मंडी सचिव को निर्माण में उपयोग हो रही सामग्री की जानकारी नहीं है, या फिर सब कुछ जानते हुए भी आंखें मूंद ली गई हैं? उनकी कार्यप्रणाली पर उठते सवालों का जवाब कौन देगा? जिम्मेदारों की यह कथित चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है।
अभियंताओं की निगरानी आखिर किस काम की
मंडी बोर्ड के कार्यपालन अभियंता, सहायक अभियंता एवं उप अभियंताओं पर निर्माण कार्य की तकनीकी निगरानी और गुणवत्ता सुनिश्चित करने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। समय-समय पर निर्माण स्थल का निरीक्षण कर सामग्री की जांच करना उनका दायित्व है। इसके बावजूद यदि निर्माण कार्य में मिट्टीयुक्त रेत का उपयोग हो रहा है, तो यह अभियंताओं की निगरानी व्यवस्था की गंभीर विफलता को उजागर करता है। सवाल उठता है कि क्या संबंधित अधिकारी केवल कार्यालयों में बैठकर कागजी निरीक्षण कर रहे हैं? निर्माण स्थल पर उनकी वास्तविक मौजूदगी और निगरानी आखिर कहां है
सूचना पटल गायब, आखिर जनता से क्या छिपाया जा रहा है
निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना पटल का गायब होना पारदर्शिता के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। निर्माण कार्य की स्वीकृत राशि, कार्य एजेंसी, निर्माण अवधि और अन्य आवश्यक जानकारियां सार्वजनिक करने के लिए सूचना पटल लगाया जाना चाहिए। लेकिन यहां सूचना पटल का अभाव यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर निर्माण कार्य से जुड़ी जानकारियां आम जनता से क्यों छिपाई जा रही हैं? जब विकास कार्य जनता के पैसों से हो रहा है, तो जनता को उसकी जानकारी देने में इतनी उदासीनता क्यों?
उच्चस्तरीय जांच नहीं हुई तो गुणवत्ता से खिलवाड़ पर उठते रहेंगे सवाल
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि निर्माण कार्य में उपयोग की जा रही रेत एवं अन्य निर्माण सामग्री की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। निर्माण स्थल से सामग्री के नमूने लेकर स्वतंत्र प्रयोगशाला में परीक्षण कराया जाए। साथ ही मंडी बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंचकर निर्माण की तकनीकी जांच की जाए। यदि जांच में अनियमितता प्रमाणित होती है, तो संबंधित ठेकेदार एवं जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मंडी बोर्ड के उच्चाधिकारी इस कथित गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी पर संज्ञान लेंगे, या फिर जिम्मेदारों की चुप्पी के साये में सरकारी निर्माण की गुणवत्ता से इसी तरह खिलवाड़ होता रहेगा विकास के नाम पर सरकारी धन खर्च करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उस धन से होने वाले निर्माण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना भी जरूरी है। यदि निर्माण की नींव ही घटिया सामग्री पर रखी जाएगी, तो ऐसे विकास कार्यों से आम जनता का भरोसा उठना स्वाभाविक है। पंडरिया मंडी का यह निर्माण कार्य अब संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही और पारदर्शिता की असली परीक्षा बन गया है।