नारी शक्ति वंदन विधेयक के विरोध पर भड़के गोपाल साहू, कहा—यह करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं पर प्रहार
कोदवा गोडान। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व जिला पंचायत सभापति गोपाल साहू ने लोकसभा में प्रस्तुत ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक के विरोध को लेकर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के इतिहास में एक निराशाजनक और दुर्भाग्यपूर्ण अध्याय बताते हुए कहा कि यह विरोध देश की करोड़ों महिलाओं की आकांक्षाओं और उनके अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
शनिवार को कोदवा गोडान में एक पारिवारिक कार्यक्रम में पहुंचे श्री साहू ने हरिभूमि संवाददाता से चर्चा करते हुए कहा कि महिलाओं को विधायी निकायों में 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाला यह विधेयक ऐतिहासिक है। यह न केवल महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में बराबरी का अवसर देने का सशक्त माध्यम भी है। ऐसे महत्वपूर्ण विधेयक का विरोध करना संकीर्ण सोच और राजनीतिक स्वार्थ का परिचायक है।
उन्होंने विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए कहा कि जब देश में नारी शक्ति को सशक्त बनाने के लिए ठोस और ऐतिहासिक कदम उठाया जा रहा है, तब कुछ राजनीतिक दल अपनी ओछी राजनीति से ऊपर नहीं उठ पा रहे हैं। उन्होंने कहा, “यह विरोध केवल एक विधेयक का विरोध नहीं है, बल्कि उन करोड़ों महिलाओं के सपनों के खिलाफ है जो समाज और राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करना चाहती हैं।”
सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक पहल
गोपाल साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लाया गया ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक महिलाओं के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखेगा। यह विधेयक केवल कानून नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम है, जो महिलाओं को आत्मनिर्भर और आत्मविश्वासी बनाएगा। उन्होंने कहा कि जब महिलाएं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा बनेंगी, तब नीतियों में उनकी आवश्यकताओं और दृष्टिकोण का समुचित समावेश होगा, जिससे समाज के समग्र विकास को गति मिलेगी।
उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव सम्मान का स्थान दिया गया है, लेकिन लंबे समय तक उन्हें राजनीतिक भागीदारी में अपेक्षित अवसर नहीं मिल पाया। यह विधेयक उस कमी को दूर करने का प्रयास है और देश को एक नई दिशा देने वाला साबित होगा।
विपक्ष की भूमिका पर उठाए सवाल
श्री साहू ने विपक्षी दलों की भूमिका को अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि जब देशहित और महिला सशक्तिकरण की बात आती है, तब राजनीति से ऊपर उठकर समर्थन करना चाहिए। लेकिन कुछ दल केवल विरोध के लिए विरोध कर रहे हैं, जिससे उनकी मानसिकता उजागर होती है।
उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं आज जागरूक हैं और सब कुछ देख रही हैं। वे यह समझ रही हैं कि कौन उनके अधिकारों और सम्मान के लिए खड़ा है और कौन उनके रास्ते में बाधा बन रहा है। समय आने पर महिलाएं इसका जवाब लोकतांत्रिक तरीके से जरूर देंगी।
नारी सम्मान सर्वोपरि
गोपाल साहू ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारतीय जनता पार्टी के लिए नारी सम्मान सर्वोपरि है और पार्टी हमेशा से महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा महिलाओं के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनका लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंच रहा है।
अंत में उन्होंने कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन’ विधेयक देश की आधी आबादी को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। इसका विरोध करने वाले इतिहास में गलत पक्ष में खड़े नजर आएंगे, जबकि इसका समर्थन करने वाले महिलाओं के सशक्त भविष्य के निर्माण में सहभागी बनेंगे।