विकास या दादागिरी, सड़क निर्माण के नाम पर बेबस महिला की जमीन पर दावा
पंडरिया। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पंडरिया ब्लॉक अंतर्गत ग्राम भेड़ागढ़ से बैगापारा तक बन रही सड़क अब विवादों के घेरे में आ गई है। विकास के नाम पर हो रहे इस निर्माण कार्य में गंभीर अनियमितताओं और मनमानी के आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान माप-जोख में भारी गड़बड़ी की जा रही है और गरीब ग्रामीणों की जमीन को जबरन सड़क में शामिल किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (फेस-IV, बैच-1) अंतर्गत L052 भेड़ागढ़ से भेड़ागढ़ बैगापारा सड़क निर्माण कार्य चल रहा है। इस परियोजना की कुल लंबाई 1.14 किलोमीटर है, जिसकी अनुबंधित राशि 838.8 लाख रुपये बताई गई है। कार्य प्रारंभ तिथि 25 मार्च 2026 है और इसे वर्षा ऋतु को छोड़कर 12 माह में पूर्ण किया जाना है। निर्माण कार्य का जिम्मा मेसर्स एन.सी. नाहर, मालवीय नगर, दुर्ग को सौंपा गया है, जबकि क्रियान्वयन एजेंसी छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण कबीरधाम है।
लेकिन करोड़ों की इस परियोजना पर अब सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के दोनों ओर बराबर मात्रा में नाप लेकर निर्माण होना चाहिए था, लेकिन मौके पर ऐसा होता नहीं दिख रहा। आरोप है कि एक तरफ की जमीन को अधिक खींचकर सड़क निर्माण किया जा रहा है।
इस मामले में ठेकेदार के कर्मचारी हेमंत पटेल ने दावा किया कि नाप-जोख में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं हुई है। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। पीड़ित महिला अनीता बाई बघेल ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार गुहार लगाने के बावजूद उनकी बात कोई सुनने को तैयार नहीं है। उनका कहना है कि एक बेबस और लाचार महिला होने का फायदा उठाकर उसकी जमीन पर जबरन सड़क निर्माण कराया जा रहा है।
अनीता बाई बघेल ने बताया कि उन्होंने कई बार संबंधित लोगों को अवगत कराया कि उनकी जमीन निर्धारित सीमा से ज्यादा ली जा रही है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी और ठेकेदार पक्ष पूरी तरह मनमानी पर उतारू हैं। सवाल यह उठता है कि आखिर गरीब और कमजोर की आवाज कौन सुनेगा। क्या विकास का मतलब गरीब की जमीन छीनना है।
ग्रामीणों में इस पूरे मामले को लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य में पारदर्शिता है तो मौके पर पुनः निष्पक्ष माप-जोख कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। लेकिन अब तक जिम्मेदार विभाग की चुप्पी कई संदेहों को जन्म दे रही है।
सबसे बड़ा सवाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है। क्या करोड़ों की सड़क परियोजनाओं में गरीबों के अधिकारों को कुचलना अब सामान्य बात हो गई है। यदि समय रहते जांच नहीं हुई तो यह मामला बड़ा विवाद बन सकता है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो दोषियों पर कड़ी कार्रवाई हो। विकास कार्य जनता की सुविधा के लिए होते हैं, न कि उनकी जमीन और अधिकार छीनने के लिए।