भैंस डबरी में गिरी: ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला, टला बड़ा हादसा

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भैंस डबरी में गिरी: ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित निकाला, टला बड़ा हादसा
डालामौहा/पंडरीखार: डालामौहा और पंडरीखार गांव के बीच स्थित एक डबरी (छोटा तालाब) में अचानक एक भैंस के गिर जाने का मामला सामने आया है। घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। गनीमत यह रही कि समय रहते ग्रामीणों की नजर इस पर पड़ गई, जिसके बाद भारी मशक्कत करके भैंस को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। इस बचाव कार्य से एक बड़ा हादसा टल गया और पशु मालिक ने राहत की सांस ली है।

मिली जानकारी के अनुसार, यह घटना दशवंत डहरिया के खेत के पास स्थित डबरी में हुई। रोज की तरह मवेशी खेत के आसपास चर रहे थे। इसी दौरान एक भैंस अचानक पैर फिसलने या अनियंत्रित होने के कारण डबरी के गहरे पानी और दलदल में जा गिरी। डबरी की गहराई और कीचड़ अधिक होने की वजह से भैंस खुद बाहर निकलने में पूरी तरह असमर्थ थी। भैंस को संकट में देख आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत शोर मचाया, जिसे सुनकर डालामौहा और पंडरीखार के ग्रामीण भारी संख्या में मौके पर इकट्ठा हो गए।
रस्सी के सहारे खींचा बाहर
ग्रामीणों ने बिना समय गंवाए तुरंत बचाव कार्य शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शी विजय कुमार डहरिया ने घटना की जानकारी देते हुए बताया कि भैंस को डबरी से बाहर निकालना बेहद चुनौतीपूर्ण था। कीचड़ के कारण भैंस लगातार नीचे धंसती जा रही थी। इसके बाद ग्रामीणों ने सूझबूझ का परिचय दिया और एक मजबूत रस्सी का इंतजाम किया। ग्रामीणों ने बेहद सावधानी से रस्सी को भैंस के शरीर में बांधा। इसके बाद गांव के दर्जनों युवाओं और बुजुर्गों ने मिलकर पूरी ताकत से रस्सी को ऊपर की ओर खींचना शुरू किया।

भारी मशक्कत के बाद मिली सफलता
विजय कुमार डहरिया ने आगे बताया कि भैंस का वजन अधिक होने और डबरी में फिसलन होने के कारण भारी मशक्कत करनी पड़ी। काफी देर तक चले इस रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद आखिरकार ग्रामीणों के सामूहिक प्रयास और एकता की बदौलत भैंस को सुरक्षित पानी से बाहर खींच लिया गया। बाहर निकलने के बाद पशु पूरी तरह सुरक्षित पाया गया है, जिससे ग्रामीणों ने राहत की सांस ली। संकट के समय डालामौहा और पंडरीखार के ग्रामीणों द्वारा दिखाए गए इस आपसी सहयोग और तत्परता की डबरी के आसपास के क्षेत्रों में जमकर सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि अगर ग्रामीण सही समय पर एकजुट नहीं होते, तो मवेशी की जान को खतरा हो सकता था।

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