लोक कला संरक्षण के लिए सुनील कुमार धुर्वे ‘लोक धरोहर सम्मान’ से सम्मानित
रायपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपरा और लोक कलाओं के संरक्षण एवं संवर्धन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए माननीय श्री सुनील कुमार धुर्वे को प्रतिष्ठित ‘लोकधरा गौरव सम्मान 2026’ के अंतर्गत ‘लोक धरोहर सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें पारंपरिक लोक कला को सहेजने, नई पीढ़ी तक पहुंचाने तथा लोक कलाकारों की प्रतिभा को प्रोत्साहित करने के लिए प्रदान किया गया।
यह सम्मान समारोह छत्तीसगढ़ प्रदेश लोक कलाकार कल्याण संघ के तत्वावधान में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लोक कला, संस्कृति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े अनेक कलाकार, पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि एवं कला प्रेमी उपस्थित रहे। समारोह के दौरान श्री सुनील कुमार धुर्वे को सम्मान पत्र एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर उनके योगदान की सराहना की गई।
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि ‘लोक कला का सम्मान, संस्कृति का उत्थान और समाज का अभियान’ इस पहल का प्रमुख उद्देश्य है। छत्तीसगढ़ की पहचान यहां की विविध लोक परंपराओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, वाद्ययंत्रों और पारंपरिक कलाओं से जुड़ी हुई है। बदलते समय और आधुनिकता के बीच इन विधाओं को संरक्षित रखना एक बड़ी जिम्मेदारी है। इसी दिशा में कार्य करने वाले कलाकारों और कला संरक्षकों को सम्मानित कर उनका उत्साह बढ़ाना इस आयोजन का महत्वपूर्ण उद्देश्य रहा।
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि लोक कला केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि यह किसी समाज की संस्कृति, इतिहास और जीवनशैली की जीवंत अभिव्यक्ति होती है। छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं में यहां के ग्रामीण एवं आदिवासी जीवन, परंपराओं, रीति-रिवाजों और प्रकृति के प्रति जुड़ाव की झलक देखने को मिलती है। ऐसे में लोक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराना और उनकी कला को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना आवश्यक है।
सुनील कुमार धुर्वे को मिले ‘लोक धरोहर सम्मान’ को लोक कला के क्षेत्र में उनके कार्यों की महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है। सम्मान प्राप्त होने पर उन्होंने आयोजकों एवं सभी कला प्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि लोक कला और संस्कृति हमारी पहचान और हमारी जड़ों से जुड़ी विरासत है। इसे जीवित रखना केवल कलाकारों की नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है। उन्होंने लोक कलाकारों को प्रोत्साहन और उचित मंच मिलने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
इस अवसर पर उपस्थित लोक कला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों ने श्री धुर्वे को सम्मान मिलने पर बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मान कलाकारों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं और समाज में लोक संस्कृति के प्रति सम्मान की भावना को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम में लोक कलाकारों ने अपनी पारंपरिक प्रस्तुतियों के माध्यम से छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विविधता और लोक परंपराओं की झलक भी प्रस्तुत की। कलाकारों की प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया। समारोह का वातावरण पूरी तरह छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और कला की रंगत से सराबोर रहा।
श्री सुनील कुमार धुर्वे को मिले इस सम्मान से उनके शुभचिंतकों, कला प्रेमियों और लोक कलाकारों में हर्ष का माहौल है। लोगों ने उम्मीद जताई कि ऐसे सम्मान और आयोजन छत्तीसगढ़ की लोक कलाओं को नई पहचान देने के साथ युवा पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।