कस्टम मिलिंग में 59.25 हजार क्विंटल चावल का हिसाब गायब! राम राइस मिल पर कलेक्टर का शिकंजा
भौतिक सत्यापन में 10,480 क्विंटल के बजाय मिला महज 4,554.52 क्विंटल चावल, करीब 2.10 करोड़ रुपये के धान का मामला; जब्ती, वसूली, बैंक गारंटी जब्ती और तीन साल ब्लैकलिस्ट की कार्रवाई प्रस्तावित
कवर्धा। जिले में धान कस्टम मिलिंग व्यवस्था की पारदर्शिता और निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। कबीरधाम जिला के बोड़ला ब्लॉक ग्राम गंडईकला स्थित राम राइस मिल के संचालक/प्रोपराइटर को जिला प्रशासन की ओर से कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। 3 अक्टूबर 2026 को राजस्व, खाद्य, पुलिस, नागरिक आपूर्ति निगम, स्टेट वेयर हाउसिंग कॉर्पोरेशन एवं विपणन संघ की संयुक्त टीम द्वारा किए गए भौतिक सत्यापन में मिल के स्टॉक में भारी अंतर सामने आने का उल्लेख नोटिस में किया गया है।
नोटिस के अनुसार, कस्टम मिलिंग वर्ष 2025-26 में मिल के लिए ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार 10,480 क्विंटल चावल जमा किया जाना शेष प्रदर्शित था, लेकिन मौके पर भौतिक सत्यापन के दौरान महज 4,554.52 क्विंटल चावल पाया गया। इस तरह 5,925.48 क्विंटल चावल कम पाया गया। प्रशासन ने इसे गंभीर अनियमितता मानते हुए मिल संचालक से जवाब तलब किया है।
मिल परिसर में 8,844 बोरा धान मिला, फिर चावल का हिसाब कहां गया?
जांच दल के भौतिक सत्यापन में मिल परिसर में अलग-अलग स्टॉक में कुल 8,844 बोरा धान उपलब्ध पाया गया। इसमें मोटा धान, पतला धान, ब्रोकन राइस तथा चावल का स्टॉक शामिल बताया गया है। नोटिस में उपलब्ध स्टॉक को अनुपातिक चावल में परिवर्तित करने पर 5,925.48 क्विंटल की मात्रा का उल्लेख किया गया है।
प्रशासन द्वारा दर्ज जांच निष्कर्षों ने मिलिंग व्यवस्था की निगरानी पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर रिकॉर्ड में दर्शाई गई मात्रा और मौके पर उपलब्ध स्टॉक के बीच इतना बड़ा अंतर कैसे पैदा हुआ?
करीब 2.10 करोड़ रुपये के धान का मामला
नोटिस में प्रथम दृष्टया 4,554.52 क्विंटल चावल, जिसकी अनुपातिक धान मात्रा 6,797 क्विंटल बताई गई है, के अपयोजन का उल्लेख किया गया है। वर्ष 2025-26 की प्रचलित धान उपार्जन दर 3,100 रुपये प्रति क्विंटल के आधार पर इसकी अनुमानित कीमत 2,10,70,700 रुपये आंकी गई है।
यानी मामला महज स्टॉक में मामूली कमी का नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये के सरकारी धान और उससे जुड़े कस्टम मिलिंग रिकॉर्ड की गंभीर गड़बड़ी तक पहुंचता दिखाई दे रहा है।
रिकॉर्ड गायब, परिसर में हजारों खाली बारदाने भी मिले
जांच के दौरान मिल परिसर में बी-01 पंजी, मासिक विवरणी पंजी एवं अन्य दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात भी नोटिस में दर्ज है। इतना ही नहीं, मिल परिसर में लगभग 75 हजार खाली जूट बारदाने पाए जाने का उल्लेख किया गया है। बिजली मीटर की रीडिंग भी 1458.2 kWh दर्ज की गई।
इन परिस्थितियों ने जांच की गंभीरता और मिल संचालन की वास्तविक स्थिति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच के दौरान संचालक रहे अनुपस्थित, ताला लगा मिला मिल परिसर
नोटिस के मुताबिक संयुक्त जांच टीम जब मिल पहुंची, उस दौरान संचालक अनुपस्थित थे। मिल परिसर में ताला लगा पाया गया और उपस्थित कर्मचारियों के पास चाबी नहीं होने की बात सामने आई। बाद में मिल प्रबंधन की ओर से प्रतिनिधि रमेश चन्द्रवंशी जांच में उपस्थित हुए और उनका लिखित बयान भी दर्ज किया गया।
स्टॉक जब्त, आगे की कार्रवाई के संकेत
प्रशासन ने जांच के दौरान पाए गए धान एवं चावल के स्टॉक को मिल संचालक के प्रतिनिधि से जप्त कर आगामी आदेश तक सुपुर्दगी में दिए जाने का उल्लेख किया है। इससे साफ है कि प्रशासन ने मामले को महज कागजी जवाब-तलब तक सीमित नहीं रखा है।
तीन साल ब्लैकलिस्ट से लेकर अभियोजन तक प्रस्तावित कार्रवाई
कारण बताओ नोटिस में प्रशासन ने कस्टम मिलिंग से संबंधित शर्तों और आदेशों के उल्लंघन का उल्लेख करते हुए कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। प्रस्तावित कार्रवाई में—
जप्त संपूर्ण सामग्री को शासन के पक्ष में राजसात करना।
अपयोजित धान की पूरी मात्रा की 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से वसूली।
बैंक गारंटी शासन के पक्ष में राजसात करना।
राम राइस मिल को आगामी तीन वर्षों के लिए काली सूची में डालना।
मिल संचालक के विरुद्ध अभियोजन की कार्रवाई शुरू करना।
जैसी कार्रवाई शामिल है।
अब बड़ा सवाल—इतनी बड़ी कमी के लिए जिम्मेदार कौन?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि कस्टम मिलिंग के रिकॉर्ड में हजारों क्विंटल चावल जमा किया जाना शेष था और मौके पर उससे कई गुना कम मात्रा मिली, तो इतने बड़े अंतर की निगरानी अब तक कैसे नहीं हो सकी? क्या संबंधित विभागों की नियमित निगरानी महज कागजी खानापूर्ति तक सीमित थी? और यदि स्टॉक का भौतिक सत्यापन समय पर होता, तो इतनी बड़ी कथित कमी सामने आने में इतना समय क्यों लगा?
जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट ने अब मिलिंग व्यवस्था की निगरानी, रिकॉर्ड संधारण और सरकारी धान के रख-रखाव पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि अंतिम जिम्मेदारी और दोष का निर्धारण संचालक के जवाब तथा आगे की जांच एवं विधिक कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा।
प्रशासन ने मिल संचालक को तीन दिवस के भीतर अपना पक्ष प्रस्तुत करने का अवसर दिया है। जवाब नहीं देने की स्थिति में एकतरफा कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। अब निगाह इस बात पर है कि करोड़ों रुपये के इस कथित स्टॉक अंतर मामले में प्रशासन आगे कितनी सख्ती दिखाता है और जिम्मेदारी किस पर तय होती है।