खेती-मजदूरी से मेडिकल कॉलेज तक पहुँचा वनांचल का होनहार बलीराम
कोरोना काल में पढ़ाई छूटी, आईटीआई के बाद भिलाई में रहकर की तैयारी; 367 अंक हासिल कर एमबीबीएस में चयन
पण्डरिया। वनांचल ग्राम केशलीगोड़ान के प्रतिभाशाली युवा बलीराम मरकाम ने कठिन परिस्थितियों और संघर्षों को पीछे छोड़ते हुए एमबीबीएस में चयन हासिल कर अपने परिवार, शिक्षकों, गांव और पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है। बलीराम का चयन शासकीय मेडिकल कॉलेज महासमुंद में हुआ है। उनकी सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणादायक है, जो सीमित संसाधनों और विपरीत परिस्थितियों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं।
बलीराम की सफलता का सफर आसान नहीं रहा। 12वीं कक्षा के बाद कोरोना काल में उनकी पढ़ाई में व्यवधान आया और उन्हें पढ़ाई छोड़नी पड़ी। इसके बाद उन्होंने एक वर्ष तक आईटीआई की पढ़ाई की। साथ ही खेती-मजदूरी कर परिवार का सहयोग किया और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी जारी रखी। आर्थिक एवं पारिवारिक परिस्थितियों के बीच उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया।
अपने सपने को पूरा करने के लिए बलीराम भिलाई में रहकर लगातार तैयारी करते रहे। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने मेहनत, अनुशासन और लगन को अपना हथियार बनाया। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने 367 अंक हासिल कर एमबीबीएस में स्थान प्राप्त किया। पढ़ाई के साथ-साथ खेलों में भी बलीराम का प्रदर्शन बेहतर रहा है।
चयन के बाद गुरुओं का आशीर्वाद लेने पहुँचे स्कूल
एमबीबीएस में चयन होने के बाद बलीराम मरकाम अपने पुराने शिक्षकों का आशीर्वाद लेने शासकीय प्राथमिक विद्यालय केशलीगोड़ान पहुँचे। विद्यालय पहुंचने पर शिक्षकों ने तिलक-चंदन लगाकर और हार पहनाकर उनका आत्मीय स्वागत किया। शिक्षकों ने मिठाई खिलाकर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं स्कूली बच्चों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ बलीराम का उत्साहपूर्ण स्वागत किया।
इस अवसर पर ग्राम पंचायत केशलीगोड़ान के जनप्रतिनिधि गणेश धुर्वे, प्राथमिक एवं माध्यमिक विद्यालय के प्रधान पाठक विजय चंदेल एवं शिवकुमार बंजारे, शिक्षक सत्येन्द्र नाथ प्रताप सिंह, श्रीमती लता चांदसे, शेखलतीफ खान, रामायण प्रसाद ओग्रे सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
वनांचल के युवाओं के लिए बने प्रेरणा
बलीराम मरकाम की उपलब्धि केवल उनके परिवार की सफलता नहीं है, बल्कि पूरे वनांचल क्षेत्र के बच्चों और युवाओं के लिए प्रेरणा का विषय बन गई है। पढ़ाई में आए व्यवधान, आर्थिक चुनौतियों और खेती-मजदूरी जैसी परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने अपने लक्ष्य को नहीं छोड़ा।
विद्यालय में उनके सम्मान के दौरान शिक्षकों ने कहा कि बलीराम ने साबित किया है कि परिस्थितियां कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत लगातार जारी रखी जाए तो सफलता जरूर हासिल की जा सकती है। गांव के शिक्षकों और ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि बलीराम भविष्य में डॉक्टर बनकर अपने क्षेत्र और समाज की सेवा करेंगे।