विश्व आदिवासी दिवस पर कड़मा में भव्य आयोजन, जिला पंचायत सभापति दीपा धुर्वे ने आदिवासी वेशभूषा में की शिरकत

lok sev
previous arrow
next arrow
विश्व आदिवासी दिवस पर कड़मा में दिखी आदिवासी संस्कृति की झलक, जिला पंचायत सभापति दीपा धुर्वे ने की सहभागिता
कुकदुर/कबीरधाम। 09 अगस्त विश्व आदिवासी/मूल निवासी दिवस के पावन अवसर पर तहसील कुकदुर क्षेत्र के ग्राम कड़मा एवं बीचपारा कड़मा में आदिवासी दिवस समारोह का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम में जिला पंचायत कबीरधाम की सभापति श्रीमती दीपा धुर्वे मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। आदिवासी वेशभूषा में पहुंचीं दीपा धुर्वे का ग्रामवासियों ने आत्मीय एवं पारंपरिक तरीके से स्वागत-अभिनंदन किया।
समारोह की शुरुआत आदिवासी समाज की आस्था और परंपरा के अनुरूप भगवान बिरसा मुंडा एवं बूढ़ादेव की पूजा-अर्चना से हुई। इस दौरान क्षेत्रवासियों की सुख-समृद्धि, खुशहाली और उज्ज्वल भविष्य की कामना की गई। कार्यक्रम में आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में ग्रामीण, समाज के वरिष्ठजन, जनप्रतिनिधि, माताएं-बहनें, युवा और बच्चे शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जिला पंचायत सभापति दीपा धुर्वे ने आदिवासी समाज की गौरवशाली संस्कृति, परंपरा, रीति-रिवाज और जल-जंगल-जमीन से जुड़े जीवन मूल्यों को नमन किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी संस्कृति केवल हमारी पहचान नहीं, बल्कि हमारे पूर्वजों से मिली अमूल्य धरोहर है। इसे सुरक्षित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज के प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन के साथ आदिवासी समाज का रिश्ता सदियों पुराना है। प्रकृति के संरक्षण, सामाजिक एकता, परंपराओं और लोक जीवन में आदिवासी समाज की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि अपनी संस्कृति, बोली, परंपरा और विरासत को सहेजने का संकल्प लेने का दिन भी है।
बच्चों और कलाकारों ने बिखेरा संस्कृति का रंग
समारोह के दौरान आदिवासी समाज के नन्हे-मुन्ने बच्चों एवं प्रतिभावान कलाकारों ने पारंपरिक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। लोकगीत, लोकनृत्य और आदिवासी संस्कृति से जुड़ी प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। बच्चों और कलाकारों के उत्साह एवं अपनी संस्कृति के प्रति प्रेम की उपस्थित लोगों ने जमकर सराहना की।
इस अवसर पर सभापति दीपा धुर्वे ने माताओं-बहनों, ग्रामीणजनों एवं समाज के वरिष्ठजनों से आत्मीय मुलाकात कर उनका कुशलक्षेम जाना और विश्व आदिवासी दिवस की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं।
संस्कृति संरक्षण के साथ शिक्षा और विकास पर जोर
कार्यक्रम में आदिवासी समाज की एकता, शिक्षा, संस्कार और विकास को लेकर भी संदेश दिया गया। वक्ताओं ने कहा कि समाज की गौरवशाली परंपराओं को जीवित रखते हुए नई पीढ़ी को बेहतर शिक्षा और विकास के अवसर उपलब्ध कराना जरूरी है।

समारोह के दौरान ग्रामीणों में खासा उत्साह देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा, लोक संस्कृति और सामूहिक सहभागिता ने पूरे कार्यक्रम को विशेष बना दिया।
अंत में सभी ने आदिवासी संस्कृति, बोली, परंपरा, जल-जंगल-जमीन और पूर्वजों की विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि आधुनिक विकास के साथ अपनी जड़ों, संस्कृति और परंपराओं को बचाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
“हमारी संस्कृति हमारी पहचान है, हमारी परंपरा हमारा अभिमान है।”
इस अवसर पर समस्त आदिवासी समाज एवं क्षेत्रवासियों को विश्व आदिवासी/मूल निवासी दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी गईं।
जय जोहार। जय बूढ़ादेव। जय बिरसा मुंडा। सेवा जोहार।

Related posts