भीषण गर्मी की मार: कवर्धा के पंडरिया ब्लॉक के आगरपानी में जल संकट गहराया, सूखते कुओं ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुसीबत

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भीषण गर्मी की मार: कवर्धा के पंडरिया ब्लॉक के आगरपानी में जल संकट गहराया, सूखते कुओं ने बढ़ाई ग्रामीणों की मुसीबत
पंडरिया। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम (कवर्धा) जिले के वनांचल क्षेत्रों में गर्मी की शुरुआत के साथ ही पानी के लिए हाहाकार मच गया है। पंडरिया ब्लॉक के अंतिम छोर पर स्थित ग्राम पंचायत आगरपानी के स्कूलपारा में इन दिनों जल संकट विकराल रूप धारण कर चुका है। चढ़ते पारे और भीषण गर्मी के कारण गांव के पारंपरिक जल स्रोत दम तोड़ रहे हैं, जिससे ग्रामीणों को बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
सूखते कुएं और गिरता जलस्तर
स्कूलपारा में पानी का मुख्य जरिया स्थानीय कुएं हैं, लेकिन इस वर्ष पड़ रही बेतहाशा गर्मी ने जमीन के भीतर के जलस्तर को काफी नीचे धकेल दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कुओं का पानी अब सूखने की कगार पर है। सुबह होते ही महिलाएं और बच्चे पानी की तलाश में बर्तन लेकर निकल पड़ते हैं, लेकिन घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों की आपबीती
स्थानीय निवासियों ने बताया कि गर्मी की तपिश इतनी ज्यादा है कि कुओं में पानी का पुनर्भरण (Recharge) नहीं हो पा रहा है। ग्रामीण सुबह तड़के से ही कुओं पर कतार लगा लेते हैं। स्कूलपारा के ग्रामीणों का कहना है, “हमें पीने के पानी के साथ-साथ निस्तारी के लिए भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अगर समय रहते प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया, तो आने वाले दिनों में स्थिति और भी भयावह हो जाएगी।”
विकास की दावों के बीच प्यासा वनांचल
पंडरिया ब्लॉक का यह इलाका दुर्गम और वनांचल होने के कारण अक्सर मूलभूत सुविधाओं से वंचित रह जाता है। शासन की ‘नल-जल योजना’ और अन्य पेयजल योजनाओं के बड़े-बड़े दावों के बावजूद, जमीनी हकीकत यह है कि आगरपानी जैसे सुदूर पंचायतों में आज भी लोग कुओं और झिरिया के भरोसे हैं। भीषण गर्मी ने अब इस भरोसे को भी तोड़ना शुरू कर दिया है।
प्रशासनिक दखल की दरकार
गांव में गहराते इस जल संकट को लेकर ग्रामीणों में भारी रोष है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि स्कूलपारा में तत्काल नए हैंडपंप खनन कराए जाएं या टैंकरों के माध्यम से पानी की सप्लाई सुनिश्चित की जाए। जल संकट के कारण न केवल इंसानों, बल्कि मवेशियों के लिए भी पीने के पानी की समस्या खड़ी हो गई है।
अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस सुदूर पंचायत की सुध कब लेता है और ग्रामीणों को इस ‘प्यासी गर्मी’ से कब राहत मिलती है।

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