सामाजिक कार्यक्रमों में बचा हुआ भोजन बन रहा है बेजुबानों का काल, सिंगपुर में गाय की मौत

lok sev
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सामाजिक कार्यक्रमों में बचा हुआ भोजन बन रहा है बेजुबानों का काल, सिंगपुर में गाय की मौत
सिंगपुर: ग्रामीण अंचलों में शादी-ब्याह, दशगात्र और अन्य सामाजिक आयोजनों का सीजन चल रहा है। इन कार्यक्रमों में अक्सर भारी मात्रा में भोजन बनाया जाता है, लेकिन इसके बाद होने वाली एक बड़ी लापरवाही अब बेजुबान जानवरों की जान पर भारी पड़ रही है। ग्राम सिंगपुर से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहाँ बचा हुआ बासी या खराब भोजन खाने से एक गाय की मृत्यु हो गई है, जबकि दो अन्य गायों की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है।
क्या है पूरा मामला?
अक्सर देखा जाता है कि सामाजिक कार्यक्रमों के समापन के बाद आयोजक बचे हुए भोजन (जैसे पके हुए चावल, दाल, सब्जी या अन्य खाद्य सामग्री) को सड़कों के किनारे, खुले मैदानों या कूड़े के ढेरों पर फेंक देते हैं। गर्मी और नमी के कारण यह भोजन बहुत जल्दी दूषित हो जाता है और उसमें बैक्टीरिया पनपने लगते हैं। जब खुले में घूमने वाली गाय या भैंस इस ‘विषैले’ हो चुके भोजन को खाती हैं, तो उन्हें फूड पॉइजनिंग हो जाती है। सिंगपुर में हुई घटना इसी लापरवाही का नतीजा है।

बचाव का सही तरीका: तालाब या नदी में करें ठंडा
ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक महत्वपूर्ण अपील जारी की है। यदि आपके घर या गांव में कोई भी बड़ा कार्यक्रम हो, तो बचे हुए भोजन को भूलकर भी खुले में न फेंकें। इस भोजन को किसी तालाब, नदी या पानी के स्रोत के पास ले जाकर उसे अच्छी तरह ‘ठंडा’ (डिस्पोज) करें या जमीन में गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें। ऐसा करने से पशु उसे खा नहीं पाएंगे और उनकी जान सुरक्षित रहेगी।
अपील: सूचना को जन-जन तक पहुँचाएँ
एक गाय की मृत्यु सिर्फ एक पशु की हानि नहीं है, बल्कि एक परिवार की आर्थिक और भावनात्मक क्षति भी है। इस सूचना को अधिक से अधिक शेयर करें ताकि अन्य गांवों में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। आपकी एक छोटी सी जागरूकता किसी बेजुबान की जान बचा सकती है।

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