कौशल्या धाम जामड़ी पाटेश्वर में प्रदेश स्तरीय मानस संगोष्ठी आयोजित

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कौशल्या धाम जामड़ी पाटेश्वर में प्रदेश स्तरीय मानस संगोष्ठी आयोजित
मानस कौशल्या पर वक्ताओं ने रखे विचार, माता कौशल्या मंदिर निर्माण में सहयोग का आह्वान
जामड़ी पाटेश्वर स्थित मां कौशल्या धाम में पुरुषोत्तम मास के अवसर पर आयोजित एक माह के धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक कार्यक्रमों की श्रृंखला के अंतर्गत 26 मई को श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ द्वारा प्रदेश स्तरीय मानस सम्मेलन एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ संत श्री राम बालक दास महात्यागी के मुख्य आतिथ्य तथा प्रदेश अध्यक्ष जगदीश देशमुख की अध्यक्षता में हुआ।
कार्यक्रम में प्रदेश महासचिव राजेंद्र ठाकुर, छगन यदु, हृदय राम सोरी, रोहित जंघेल, तामेश्वर साहू, सीताराम साहू, श्याम त्रेता चंद्राकर, जितेंद्र पटेल, सुभाष यादव, लीलार सिन्हा, बी.आर. बेलसर एवं सर्वेंद्र विनायक सहित प्रदेशभर से आए मानस प्रेमी और वक्ता उपस्थित रहे।
अध्यक्षीय उद्बोधन में जगदीश देशमुख ने कहा कि भगवान श्रीराम के अवतार के लिए भी श्रेष्ठ गर्भ की आवश्यकता थी और पूरे ब्रह्मांड में माता कौशल्या का गर्भ ही उन्हें धारण करने योग्य मिला। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पुण्यभूमि पर माता कौशल्या का भव्य एवं दिव्य मंदिर संत श्री राम बालक दास महात्यागी के संकल्प और तपस्या से आकार ले रहा है। श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान छत्तीसगढ़ मंदिर निर्माण में तन, मन और धन से सहयोग करेगा।
मुख्य अतिथि संत श्री राम बालक दास महात्यागी ने श्री तुलसी मानस प्रतिष्ठान के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि यह मंदिर केवल एक समाज का नहीं बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ के सर्वसमाज की आस्था का केंद्र है। उन्होंने कहा कि माता कौशल्या का यह भव्य मंदिर सामाजिक समरसता और सर्वसमावेशी भावना का प्रतीक बनेगा।

मानस संगोष्ठी में प्रदेशभर से आए वक्ताओं ने “बंदउँ कौशल्या दिसि प्राची” चौपाई को आधार बनाकर माता कौशल्या के महत्व पर प्रकाश डाला। वक्ताओं ने माता कौशल्या को पूर्व दिशा और भगवान श्रीराम को उस दिशा से उदित होने वाले सूर्य की उपमा देते हुए भावपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अंत में संत श्री राम बालक दास महात्यागी ने दानदाताओं एवं प्रतिष्ठान के पदाधिकारियों को माता कौशल्या की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया। आरती एवं मंगल पाठ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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